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Chaitra Navratri 2022 : 02 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि शुरू, उससे पहले जानें वास्तु नियमों के अनुसार कैसे करें देवी दुर्गा की उपासना

Sun, 27 Mar 2022 07:05 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 27 Mar 2022 07:05 AM IST
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chaitra navratri 2022 navratri puja vidhi puja according to vastu shastra poja samagri ghatasthapana vidhi
navratri 2022: नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी के नौ अलग-अलग रूपों की उपासना करते हुए सादगी से व्रत के नियमों का पालन करते हैं। - फोटो : iStock

Navratri Puja 2022 : देवी दुर्गा और मां शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि जल्द ही शुरू होने वाला है। इस बार चैत्र नवरात्रि 02 अप्रैल से आरंभ हो रहे हैं जो 11 अप्रैल को समाप्त होंगे। मां दुर्गा के भक्तों को नवरात्रि के पर्व का इंतजार बहुत ही बेसब्री से रहता है। जिसमें 09 दिनों तक विधिवत रूप से मां दुर्गा की पूजा और आराधना की जाती है। पूरे 9 दिनों तक उपवास रखते हुए मां की साधना की जाती है। भक्त नवरात्रि के 9 दिनों तक देवी के नौ अलग-अलग रूपों की उपासना करते हुए सादगी से व्रत के नियमों का पालन करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों तक विशेष रूप से अगर वास्तु के नियमों को ध्यान रखते हुए मां की आराधना की जाए तो पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है और भक्तों के ऊपर मां का आशीर्वाद बना रहता है। 

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कलश स्थापना
कैसा रखें पूजन कक्ष
नवरात्रि के दिनों में देवी दुर्गा स्वर्गलोक से पृथ्वी पर पधारती हैं ऐसे में देवी की उपासना स्थल बहुत ही साफ और सुथरा होना चाहिए। पूजन कक्ष की दीवारें हल्के पीले, गुलाबी , हरे और बैंगनी रंगों की होनी चाहिए। क्योंकि ये रंग सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते हैं। भूलकर भी मां दुर्गा के पूजास्थल का रंग काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का नहीं होना चाहिए।
 
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कलश स्थापना
कलश स्थापना की सही जगह
वास्तु के अनुसार मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा का दिशा क्षेत्र ईशान कोण यानि कि उत्तर-पूर्व दिशा को पूजा-पाठ के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दिशा में पूजा करने से शुभ प्रभाव मिलता है और हमेशा ईश्वर का आशीर्वाद मिलता रहता है। इसलिए नवरात्रि के दिनों में माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए।
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दुर्गा पूजा
इस दिशा में मुख रखते हुए करें देवी उपासना 
देवी मां का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते वक्त आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है एवं दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से आराधक को मानसिक शांति अनुभव होती है।
 
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MAA DURGA DEVI
दीपक की दिशा
नवरात्रि के दिनों में अखंड ज्योति जलाने की विशेष परंपरा होती है। अखंड दीप को पूजा स्थल के आग्नेय यानि दक्षिण-पूर्व में रखना शुभ होता है क्योंकि यह दिशा अग्नितत्व का प्रतिनिधित्व करती है।आग्नेय कोण में अखंड ज्योति या दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है।
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