नवरात्रि के दिनों में क्रमशः शैलपुत्री माता, ब्रह्मचारिणी माता, चंद्रघंटा माता, कूष्मांडा माता, स्कंदमाता, कात्यायनी माता, कालरात्रि माता, महागौरी और सिद्धिदात्री माता का पूजन किया जाता है। नवमी तिथि पर माता सिद्धिदात्री के पूजन के साथ कन्या भोज कराने के बाद नवरात्रि के व्रत का पारण किया जाता है। इस बार चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि यानि कन्या पूजन 21 अप्रैल 2021 दिन बुधवार को कन्या पूजन किया जाएगा। नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इन कन्याओं या कंजकों को माता दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कन्या पूजन में कन्याओं की आयु का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए जानते हैं कि कितने वर्ष से लेकर कितने वर्ष की कन्याओं का किया जाता है पूजन और क्या है महत्व।
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Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि में कितने वर्ष की कन्याओं का किया जाता है कंजक पूजन, जानिए महत्व और कन्या पूजन विधि
Fri, 16 Apr 2021 05:55 PM IST
Shashi Shashi
धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Published by: Shashi Shashi
Updated Fri, 16 Apr 2021 05:55 PM IST
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नवरात्रि 2021 कन्या पूजन
नवरात्रि 2021 कन्या पूजन
कितने वर्ष की कन्याओं के पूजन का है विधान
धार्मिक मान्यता के अनुसार कंजक पूजन के लिए 02 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं को आमंत्रित करना चाहिए। इसके साथ ही एक बालक को भी आमंत्रित करें। इन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरुप और बालक को बटुक भैरव का स्वरूप मानकर पूजन किया जाता है।
नवरात्रि 2021 कन्या पूजन
- फोटो : self
दो वर्ष से 10 वर्ष की कन्याओं के पूजन का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक आयु की कन्या के मां के स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करती है। जानिए किस आयु की कन्या को क्या कहा जाता है। 10 वर्ष की कन्या सुभद्रा, 9 वर्ष की कन्या दुर्गा, 8 वर्ष की शाम्भवी, 7 वर्ष की चंडिका, 6 वर्ष की कालिका, 5 वर्ष की रोहिणी, 4 वर्ष की कल्याणी, 3 वर्ष की त्रिमूर्ति और 2 वर्ष की कन्या को कुंआरी माना जाता है।
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नवरात्रि 2021 कन्या पूजन
कन्या पूजन विधि
- आमंत्रित की गई कन्याओं और बालक के घर पर पधारने पर सर्वप्रथम शुद्ध जल से उनके पैर धोएं।
- इसके बाद कन्याओं को आसन पर बिठाकर सभी का कुमकुम और अक्षत से तिलक करें।
- इसके बाद थोड़ा सा भोजन सबसे पहले भगवान को चढ़ाएं और फिर सभी कंजक और बालक के लिए भोजन परोसें।
- सभी को भोजन कराने के पश्चात उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
- इसके बाद सभी को फल भेंट करें और सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा देकर विदा करें।