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Chaitra Amavasya 2022: दो दिन पड़ेगी चैत्र मास की अमावस्या, जानिए श्राद्ध और स्नान-दान करने का दिन

Tue, 29 Mar 2022 12:03 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 29 Mar 2022 12:03 PM IST
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Chaitra amavasya 2022 is on 31st March and 2nd April know the signimicance and remedies of amavasya
चैत्र अमावस्या को पितृ तर्पण जैसे अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है। - फोटो : istock

Chaitra Amavasya 2022: चैत्र अमावस्या को हमारे धर्म में बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। यह अमावस्या मार्च-अप्रैल के महीने में आती है। हालांकि, इस दिन का हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। इस दिन धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियां की जाती हैं, जैसे स्नान, दान और सामग्री का दान। चैत्र अमावस्या को पितृ तर्पण जैसे अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है। लोग कौवे, गाय, कुत्ते और यहां तक कि गरीब लोगों को भी भोजन कराते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार अमावस्या को पूर्वज अपने वंशजों के यहां जाते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं। चैत्र अमावस्या व्रत हिंदू धर्म में सबसे लोकप्रिय उपवासों में से एक है। अमावस्या व्रत या उपवास सुबह शुरू होता है और प्रतिपदा को चंद्रमा के दर्शन होने तक चलता है। इस बार चैत्र मास की अमावस्या तिथि एक नहीं बल्कि 2 दिन रहेगी। आइए जानते हैं हैं इस बार चैत्र अमावस्या के किस दिन श्राद्ध किया जा सकता है और किस दिन स्नान-दान किया जा सकता है। 

Chaitra amavasya 2022 is on 31st March and 2nd April know the signimicance and remedies of amavasya
इस बार चैत्र मास की अमावस्या तिथि एक नहीं बल्कि 2 दिन रहेगी। - फोटो : istock

चैत्र अमावस्या तिथि 
चैत्र अमावस्या तिथि आरंभ:  31 मार्च, गुरुवार, दोपहर 12.22 पर 
चैत्र अमावस्या तिथि समाप्त: 1 अपर, शुक्रवार प्रातः11.54 पर
इसलिए दोनों ही दिन अमावस्या तिथि मान्य रहेगी। 

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पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण कार्य 31 मार्च को किए जा सकेंगे। - फोटो : iStock

किस दिन होगा तर्पण कार्य 
ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार 31 मार्च, गुरुवार को अमावस्या तिथि दोपहर 12.22 बजे बाद शुरू होगी। इसलिए पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण कार्य 31 मार्च को किए जा सकेंगे। अमावस्या से संबंधित पूजन आदि भी इसी दिन की जा सकती है।

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1 अप्रैल, शुक्रवार को अमावस्या तिथि सूर्योदय के बाद भी रहेगी इसलिए इस दिन गंगास्नान और दान करना श्रेष्ठ रहेगा। - फोटो : istock

स्नान-दान आदि 1 अप्रैल को   
1 अप्रैल, शुक्रवार को अमावस्या तिथि सूर्योदय के बाद भी रहेगी इसलिए इस दिन गंगास्नान और दान करना श्रेष्ठ रहेगा। अगर किसी कारण नदी में स्नान करने न जा पाएं तो घर में ही स्नान के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इससे भी तीर्थ स्नान का फल मिलता है।

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पुराणों में उल्लेख किया गया है कि इस शुभ दिन पर गंगा नदी में स्नान करने से आपके पापों और बुरे कर्मों का नाश होता है। - फोटो : प्रयागराज

चैत्र अमावस्या का महत्व
चैत्र अमावस्या वर्ष की पहली अमावस्या है और चैत्र के महीने या हिंदू कैलेंडर के पहले महीने में आती है। इस वर्ष चैत्र अमावस्या 31 मार्च और 1 अप्रैल, 2022 को पड़ने जा रही है।  ऐसा माना जाता है कि चैत्र अमावस्या पर भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन से दर्द, संकट और नकारात्मकता को खत्म करने में मदद मिलती है। पुराणों में उल्लेख किया गया है कि इस शुभ दिन पर गंगा नदी में स्नान करने से आपके पापों और बुरे कर्मों का नाश होता है।अमावस्या तिथि पर भक्त अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध आदि भी करते हैं, ऐसा करने से  पितृ दोष खत्म होता है। 

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