Kanya Pujan on Ashtami And Navami: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर कन्या पूजन का बहुत अधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। लेकिन हर साल भक्तों के मन में यह बड़ा सवाल रहता है कि कन्या पूजन महाअष्टमी के दिन किया जाना चाहिए या फिर महानवमी के दिन। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार, अष्टमी और नवमी दोनों ही दिन कन्या पूजन करना बेहद शुभ और फलदायी माना गया है।
शास्त्रों में किसी भी दिन मनाए जाने पर रोक नहीं है, और यह पूरी तरह से आपके परिवार के रीति-रिवाजों तथा कुल की परंपरा पर निर्भर करता है। आइए इस लेख में समझते हैं कि दोनों तिथियों का क्या महत्व है और क्या दोनों दिन पूजन करना संभव है।
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महाअष्टमी पर कन्या पूजन
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महाअष्टमी पर कन्या पूजन और महागौरी का महत्व
जो लोग महाअष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं, उन्हें सुख, शांति, पवित्रता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस वर्ष महाष्टमी 19 अक्तूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन मां महागौरी की विशेष पूजा की जाती है, जिससे घर की दरिद्रता दूर होती है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त में कन्याओं को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है।
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महानवमी पर कन्या पूजन
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महानवमी पर कन्या पूजन और मां सिद्धिदात्री की कृपा
नवमी के दिन कन्या पूजन करने से भक्तों को ऋद्धि-सिद्धि, यश, कीर्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां देने वाली देवी मानी गई हैं। वर्ष 2026 में नवमी तिथि 20 अक्तूबर को है, और इस दिन अमृत चौघड़िया तथा अभिजीत मुहूर्त कन्या पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ माने गए हैं।
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क्या दोनों दिन कन्या पूजन करना संभव है?
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क्या दोनों दिन कन्या पूजन करना संभव है?
शास्त्रों के अनुसार, दोनों दिन कन्या पूजन करने पर कोई मनाही नहीं है। अगर कोई श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक चाहे, तो वह अष्टमी के दिन मां महागौरी के निमित्त और नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री के निमित्त दोनों दिन छोटी कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर भोजन करा सकता है।
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कुल की परंपरा
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कुल की परंपरा
अष्टमी या नवमी दोनों ही तिथियां मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय हैं। आप अपनी सुविधा और कुल की परंपरा के अनुसार किसी भी एक दिन या दोनों दिन कन्या पूजन कर सकते हैं। सच्चे मन से किया गया पूजन और कन्याओं का सत्कार माता रानी की विशेष कृपा का पात्र बनाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।