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Ahoi Ashtami 2020: क्यों महिलाएं धारण करती हैं अपने गले में स्याहु माता की माला, जानिए महत्व

Wed, 04 Nov 2020 04:25 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Wed, 04 Nov 2020 04:25 PM IST
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ahoi ashtami 2020 vrat significance Know the importance of wearing the mala of Shyu Mata
ahoi ashtami 2020

हर वर्ष कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस वर्ष अहोई अष्टमी का व्रत 8 नवंबर को किया जाएगा। करवा चौथ की तरह अहोई अष्टमी का व्रत भी महिलाएं निर्जला रहकर ही करती हैं। इसे अहोई अष्टमी या अहोई माता का व्रत कहा जाता है। यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और उन्हें हर तरह की विपत्ति से बचाने के लिए करती हैं, लेकिन विशेषतौर पर यह व्रत पुत्रों के लिए किया जाता है। कुछ निसंतान महिलाएं पुत्र प्राप्ति के लिए भी अहोई माता का व्रत करती हैं। अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं अहोई माला धारण करती हैं। क्या आप जानते हैं कि ये माला क्यों धारण की जाती है और इसका महत्व क्या है। नहीं पता है तो कोई बात नहीं चलिए जानते हैं। 

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अहोई अष्टमी को महिलाएं संध्या काल में पूरे विधि-विधान के साथ अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की लंबी उम्र एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। तारों की छांव में अर्घ्य देती हैं। इस दिन अहोई माता की पूजा में चांदी की अहोई बनाते हैं, जिसे स्याहु कहा जाता है। रोली, अक्षत, दूध, और भात से इसकी पूजा की जाती है, इसके बाद एक कलावा लेकर उसमे स्याहु का लॉकेट और चांदी के दाने डालकर माला बनाई जाती है। व्रत करने वाली माताएं इस माला को अपने गले में अहोई से लेकर दिवाली तक धारण करती हैं। इस माला की पूजा पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए। जानते हैं कि इस माला को पहनने का क्या महत्व है।


 

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अहोई अष्टमी - फोटो : self

जानते हैं अहोई माला धारण करने का महत्व
स्याहु माला को संतान की लंबी आयु की कामना के साथ पहना जाता है। दिवाली तक इसे पहनना आवश्यक माना जाता है। हर वर्ष इस माला में एक चांदी का मोती बढ़ाया जाता है। मान्यता है कि इससे  पुत्र की आयु लंबी होती है। जानते हैं स्याहु माला पूजा करने की विधि

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की विधिवत् पूजा करें और करवा में जल भरकर रखें। अहोई माता की कथा सुने। स्याहु माता के लॉकेट की पूजा करें, उसके बाद संतान को पास में बैठाकर माला बनाएं। संतान का तिलक करें और माला धारण करें। करवे के जल से पुत्रों को स्नान भी कराया जाता है। अहोई माता अपने पुत्र की लंबी आयु की प्रार्थना करें। 

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