Rawan: रावण जैसा महाज्ञानी और पराक्रमी नहीं था कोई, उसके वैभव को देखकर हनुमान जी भी हो गए थे मुग्ध
भले ही रावण का सर्वनाश उसके अहंकार की वजह से हुआ, लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि रावण महा ज्ञानी और शिव जी का परम भक्त था। महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में रावण के ज्ञान और सुंदरता का वर्णन मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जब भगवान हनुमान माता सीता की खोज में लंका पहुंचे थे तो वो भी रावण को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए थे। रामायण में लिखा है हनुमान जी ने रावण के वैभव को देखते हुए कहा था कि-
अहो रूपमहो धैर्यमहोत्सवमहो द्युति:।
अहो राक्षसराजस्य सर्वलक्षणयुक्तता॥
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वाल्मीकि रामायण के अलावा ऐसे कई पौराणिक ग्रंथ और शास्त्र हैं, जिनमें रावण को महाज्ञानी बताया गया है। खुद रावण ने कई शास्त्र लिखे हैं। रावण शिव जी का परम भक्त था, उसने ही शिव तांडव की रचना की थी। इसके अलावा रावण तंत्र, ज्योतिष और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञाता था।
रावण के बारे में कहा जाता है कि रावण को चारों वेदों और छह शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान था। रावण के दस सिर इसी ज्ञान के प्रतीक थे। इसी ज्ञान और बुद्धि के बल पर ही रावण का सम्मान उसके शत्रुओं तक में था।