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Adi Shankaracharya Jayanti 2022: आज है आदिशांकरचार्य की 1234वीं जयंती, जानिए इसका महत्व और उनके विचार

Fri, 06 May 2022 10:11 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Fri, 06 May 2022 10:11 AM IST
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Adi Shankaracharya Jayanti 2022 History Significance and Inspirational Quotes
Adi Shankaracharya Jayanti 2022: आदि शंकराचार्य, जिन्हें जगतगुरु शंकराचार्य के नाम से भी जाना जाता है, भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक संतों और दार्शनिकों में से एक हैं। - फोटो : Social media

Adi Shankaracharya Jayanti 2022: आज 6 मई को आदि शंकराचार्य की 1234वीं जयंती है। आदि शंकराचार्य, जिन्हें जगतगुरु शंकराचार्य के नाम से भी जाना जाता है, भारत के महत्वपूर्ण धार्मिक संतों और दार्शनिकों में से एक हैं। आदि शंकराचार्य जयंती हर साल उनके भक्तों द्वारा वैशाख के शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि या पूर्णिमा चंद्र पखवाड़े के पांचवें दिन के दौरान मनाई जाती है। आदिगुरु शंकराचार्य का जन्म दक्षिण भारत के केरल राज्य में नम्बूदरी ब्राह्राण के यहां हुआ था। इनके जन्म के कुछ वर्षों बाद ही इनके पिता का निधन हो गया। माना जाता है गुरु शंकराचार्य ने बहुत ही अल्पआयु में वेदों को कंठस्थ कर इसमें महारथ हासिल कर लिया था। शंकराचार्य बचपन से प्रतिभा सम्पन्न बालक थे। तीन साल की उम्र में ही उन्हें मलयालम का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं इसका महत्व और उनके जीवन से जुड़े कुछ बातों के बारे में। 

Adi Shankaracharya Jayanti 2022 History Significance and Inspirational Quotes
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य की गद्दी पर नम्बूदरी ब्राह्मण ही बैठते हैं। - फोटो : adi shankaracharya

आदि शंकराचार्य जयंती इतिहास
हिंदू धर्म की पुर्नस्थापना करने वाले आदि शंकराचार्य का जन्म लगभग 1200 वर्ष पूर्व कोचीन से 5-6 मील दूर कालटी नामक गांव में नंबूदरी ब्राह्राण परिवार में जन्म हुआ था। वर्तमान में इसी कुल के ब्राह्मण बद्रीनाथ मंदिर के रावल होते हैं। इसके अलावा ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य की गद्दी पर नम्बूदरी ब्राह्मण ही बैठते हैं। आदि शंकराचार्य बचपन में ही बहुत प्रतिभाशाली बालक थे।

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कम उम्र में उन्हें वेदों का पूरा ज्ञान हो गया था और 12 वर्ष की उम्र में शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था।

कम उम्र में ही वेदों का ज्ञान
कम उम्र में उन्हें वेदों का पूरा ज्ञान हो गया था और 12 वर्ष की उम्र में शास्त्रों का अध्ययन कर लिया था। 16 वर्ष की अवस्था में 100 से भी अधिक ग्रंथों की रचना कर चुके थे। बाद में माता की आज्ञा से वैराग्य धारण कर लिया था। मात्र 32 साल की उम्र में केदारनाथ में उन्होंने समाधि ले ली। आदि शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार के लिए देश के चारों कोनों में मठों की स्थापना की थी जिसे आज शंकराचार्य पीठ कहा जाता है।

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Adi Shankaracharya Jayanti 2022 History Significance and Inspirational Quotes
आदि शंकराचार्य की जयंती वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष के दौरान पंचमी तिथि के दौरान प्रतिवर्ष मनाई जाती है और वर्तमान में अप्रैल और मई के बीच आती है।

आदि शंकराचार्य जयंती का महत्व 
आदि शंकराचार्य की जयंती वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष के दौरान पंचमी तिथि के दौरान प्रतिवर्ष मनाई जाती है और वर्तमान में अप्रैल और मई के बीच आती है। हिंदू संत अद्वैत वेदांत के सिद्धांत को मजबूत करने के लिए जाने जाते हैं और इसे ऐसे समय में पुनर्जीवित किया जब हिंदू संस्कृति पतन का सामना कर रही थी। ऐसा कहा जाता है कि माधव और रामानुज जैसे अन्य हिंदू संतों के साथ आदि शंकराचार्य के कार्यों ने हिंदू धर्म के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

तीनों संतों ने उन सिद्धांतों का गठन किया जो आज भी उनके संबंधित संप्रदायों द्वारा पालन किए जाते हैं। उन्हें हिंदू दर्शन के आधुनिक इतिहास में कुछ सबसे महत्वपूर्ण शख्सियतों के रूप में याद किया जाता है।
आदि शंकराचार्य के उल्लेखनीय कार्यों में भगवद गीता और 12 उपनिषदों सहित हिंदू धर्मग्रंथों पर कई टिप्पणियां शामिल हैं। हिंदू साधु ने शिवानंद लहरी, निर्वाण शातकम, मनीषा पंचकम और सौंदर्य लहरी जैसे लगभग 72 भक्ति भजनों की रचना की।
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आदि गुरु शंकराचार्य के अनमोल विचार - फोटो : adi shankaracharya

आदि गुरु शंकराचार्य के अनमोल विचार

  • मोह से भरा हुआ इंसान एक सपने की तरह है, यह तब तक ही सच लगता है जब तक आप अज्ञान की नींद में सो रहे होते हैं। जब नींद खुलती है तो इसकी कोई सत्ता नही रह जाती है। 
  • तीर्थ करने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। सबसे अच्छा और बड़ा तीर्थ आपका अपना मन है, जिसे विशेष रूप से शुद्ध किया गया हो। 
  • हर व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि आत्मा एक राजा के समान है जो शरीर, इंद्रियों, मन, बुद्धि से बिल्कुल अलग है।  आत्मा इन सबका साक्षी स्वरुप है। 
  • अज्ञान के कारण आत्मा सीमित लगती है, लेकिन जब अज्ञान का अंधेरा मिट जाता है, तब आत्मा के वास्तविक स्वरुप का ज्ञान हो जाता है, जैसे बादलों के हट जाने पर सूर्य दिखाई देने लगता है। 
  • सत्य की कोई भाषा नहीं है।  भाषा सिर्फ मनुष्य का निर्माण है, लेकिन सत्य मनुष्य का निर्माण नहीं आविष्कार है। सत्य को बनाना या प्रमाणित नहीं करना पड़ता, सिर्फ उघाड़ना पड़ता है। 
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