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जानिए अगहन मास सहित अन्य महीनों में किन-किन फूलों से करें भगवान को प्रसन्न

Sun, 06 Dec 2020 07:26 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 06 Dec 2020 07:26 AM IST
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according to hindu shastra in different months which flowers must be offered to god
1 दिसंबर से भगवान कृष्ण का प्रिय मार्गशीर्ष (अगहन) माह लग चुका है।

हिंदी पंचाग के अनुसार 1 दिसंबर से भगवान कृष्ण का प्रिय मार्गशीर्ष (अगहन) माह लग चुका है। इस मास का महत्व बताते हुए श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि मार्गशीर्ष माह उनका ही स्वरुप है। मान्यता है कि इस महीने में पवित्र नदियों में स्न्नान और श्रीकृष्ण या उनके किसी भी अवतार की पूजा-सेवा करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट होकर सुख-सौभाग्य मिलता है। अगहन मास में जप, तप, ध्यान करना शीघ्र फलदाई माना गया है। भगवान केशव की इस माह में पुष्पों से पूजा करना बहुत पुण्यदायी है। वैसे तो भगवान श्री कृष्ण की पूजा में कभी भी कोई भी पुष्प अर्पित किया जा सकता है लेकिन पदम् पुराण के अनुसार किस मास में किन-किन फूलों का भगवान की पूजा में उपयोग करना लाभकारी है।

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lord vishnu

चैत्र, वैशाख और ज्येष्ठ
चैत्र मास में चंपा, चमेली, दौना, कटसरैया और वरुण वृक्ष के फूलों से भी जगत के स्वामी सर्वेश्वर श्रीविष्णु का पूजन किया जा सकता है। मनुष्य को एकाग्रचित्त होकर लाल या किसी भी रंग के सुंदर कमल पुष्पों से श्री हरि का पूजन करना विशेष फलदाई है। वैशाख मास में केवड़े के पत्ते लेकर महाप्रभु श्रीविष्णु का पूजन करना चाहिए। ज्येष्ठ मास आने पर ऋतु के अनुसार अथवा नाना प्रकार के फूलों से भगवान की पूजा करनी चाहिए। जिन्होंने भक्तिपूर्वक भगवान का पूजन कर लिया उनसे श्री हरि संतुष्ट रहते हैं।

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पूजा करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

आषाढ़, सावन और भाद्रपद
आषाढ़ मास में कनेर के फूल, लाल रंग के पुष्प अथवा कमल के फूलों से भगवान की विशेष पूजा करनी चाहिए। जो सुवर्ण के समान रंग वाले कदम के फूलों से सर्वव्यापी गोविन्द की इस माह में पूजा करते है,उन्हें कभी यमराज का भय नहीं होगा। तुलसी, श्यामा तुलसी तथा अशोक के द्वारा सर्वदा पूजित होने पर श्री विष्णु नित्यप्रति कष्ट का निवारण करते हैं। जो लोग सावन आने पर अलसी या दूर्वा दल के द्वारा श्री जनार्दन की पूजा करते हैं,उन्हें भगवान प्रलयकाल तक मनोवांछित भोग प्रदान करते हैं। भादों के महीने में चंपा, श्वेत पुष्प तथा पीले और लाल रंगों के पुष्पों से पूजन करके सब कामनाओं का फल प्राप्त कर लेता है।

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दीपक

आश्विन,कार्तिक और मार्गशीर्ष
आश्विन के शुभ मास में जूही, चमेली, कमल तथा नाना प्रकार के शुभपुष्पों द्वारा श्री हरि का पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य इस पृथ्वी पर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पदार्थ प्राप्त कर लेता है। कार्तिक मास आने पर परमेश्वर श्री विष्णु की पूजा तिल अथवा उस समय के जितने भी ऋतु के अनुकूल पुष्प हैं वे सभी माधव को अर्पण करने चाहिए। मार्गशीर्ष मास जो कि श्री कृष्ण का ही स्वरुप है,इसमें नाना प्रकार के पुष्पों, उत्तम नैवेद्यों, धूपों तथा आरती आदि के द्वारा प्रसन्नता पूर्वक श्री जनार्दन का पूजन करके सभी सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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पौष, माघ और फाल्गुन
पौष माह में सभी प्रकार के तुलसी दल एवं पुष्पों से पूजन करना कल्याणदायक माना गया है। इसी प्रकार माघ मास आने पर पीले रंग जैसे सरसों,गेंदा एवं सभी रंगों के पुष्पों को भगवान की सेवा में अर्पित करें।फाल्गुन में भी पीले रंग के सभी पुष्प एवं नवीन पुष्पों अथवा सब प्रकार के फूलों से श्री हरि का अर्चन करना चाहिए।इस प्रकार श्री जगन्नाथ के पूजित होने पर व्यक्ति श्री विष्णु की कृपा से अविनाशी वैकुण्ठ को प्राप्त कर लेता है।  

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