भगवान शिव का पावन महीना सावन शुरु हो चुका है। संक्रांति के और पूर्णिमा मिलाकर सावन में यूं तो कुल पांच संक्रांति है। लेकिन आषाढ़ पूर्णिमा से सावन का आरंभ माना जाए तो इस वर्ष सावन के चार सोमवार आते हैं जिन्हें बहुत ही खास माना गया है। इन चारों सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक मनोकामना पूर्ण करने वाला है क्योंकि हर सोमवार को बन रहे हैं कुछ खास योग।
सावन में पांच सोमवार लेकिन यह चार हैं सबसे खास
पूर्णिमा के अनुसार सावन का पहला सोमवार 25 जुलाई को है। शास्त्रों के अनुसार यू तो सावन का हर सोमवार बहुत ही शुभ होता है लेकिन इस सोमवार को सिद्धि और रवि नाम का योग बना है। ऐसे में भगवान शिव की भक्ति सिद्ध करने के लिए यह सोमवार बहुत ही शुभ है। यह दोनों योग अशुभ योगों के प्रभाव को कम करने वाले हैं। बेल के पत्तों के साथ गंगाजल और दूध मिलाकर भगवान शिव को अर्पित करने मात्र से बम भोले हो जाएंगे खुश।
सावन में पांच सोमवार लेकिन यह चार हैं सबसे खास
सावन का दूसरा सोमवार 1 अगस्त को है। शिव भक्तों के लिए यह सबसे खास दिन है क्योंकि इस सोमवार को चतुर्दशी तिथि है यानी मास शिवरात्रि का महायोग बना है। साथ ही सर्वाथ सिद्धि योग और अमृत योग भी बना है। इसलिए इसदिन भगवान शिव का अभिषेक धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हर इच्छा को पूर्ण करने वाला है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस सोमवार के दिन बेलपत्र के साथ भंग धतूरा भी अर्पित करें तो बाबा भोले अति प्रसन्न होंगे। इस दिन धन और सुख की इच्छा रखने वाले को दूध या गंगा जल में शहद मिलाकर शिव जी का अभिषेक करना चाहिए।
सावन में पांच सोमवार लेकिन यह चार हैं सबसे खास
सावन का तीसरा सोमवार 8 अगस्त को है। इस दिन सिद्धि योग, अमृत योग और रवि योग बन रहा है। इन त्रियोगों में भगवान शिव का अभिषेक बहुत ही शुभ है। इस दिन सूर्योदय के समय शिव का गंगाजल से अभिषेक मंगलकारी है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक कर नए काम की शुरुआत कार्य में उन्नति देना वाला है।
सावन में पांच सोमवार लेकिन यह चार हैं सबसे खास
सावन का अंतिम सोमवार 15 अगस्त को है। इसदिन भगवान शिव का प्रिय प्रदोष व्रत है साथ ही अमृत योग, रवि योग भी है। इस दिन व्रत रखकर संध्या के समय शिव जी का अभिषेक विशेष फलदायी है।