Vat Savitri Vrat 2025: सनातन धर्म में वट सावित्री व्रत कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। इस बार अमावस्या तिथि 26 मई सोमवार को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी और अगले दिन 27 तारीख दिन मंगलवार को सुबह 8:33 तक रहेगी। इसके बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि लगेगी जो क्षय होगी। इसलिए मंगलवार को उदयातिथि में अमावस्या होने से मंगलवार को वट सावित्री का व्रत होगा, सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की दीर्घ आयु की कामना से यह व्रत करेंगी।
{"_id":"6833fe9f45d6ef2bc70f3b99","slug":"vat-savitri-vrat-2025-date-shubh-muhurat-suryoday-vyapani-amavasyal-kab-hai-2025-05-26","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Vat Savitri Vrat 2025: सूर्योदय व्यापनी अमावस्या में होगा वट सावित्री व्रत, जाने पूजा तिथि और महत्व","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Vat Savitri Vrat 2025: सूर्योदय व्यापनी अमावस्या में होगा वट सावित्री व्रत, जाने पूजा तिथि और महत्व
Mon, 26 May 2025 11:11 AM IST
ज्योति मेहरा
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Mon, 26 May 2025 11:11 AM IST
सार
27 मई को सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 17 मिनट पर होगा और अमावस्या तिथि प्रातः काल 8 बजकर 33 मिनट तक व्याप्त रहेगी। इसलिए मंगलवार को वट सावित्री व्रत रखा जायेगा और वटवृक्ष की पूजा होगी। हालांकि कई जगहों पर वट सावित्री व्रत 26 तारीख को भी मनाया जा रहा है।
विज्ञापन
Vat Savitri Vrat 2025
- फोटो : अमर उजाला
vat savitri vrat 2025
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि 26 मई सोमवार को सूर्योदय से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक तक चतुर्दशी तिथि रहेगी, तत्पश्चात अमावस्या लगेगी, अत: इसे सोमवती अमावस्या मानने का कोई औचित्य नहीं है, और न ही इस दिन वट सावित्री व्रत मनाया जाएगा।
Vat Savitri Vrat 2025
- फोटो : adobe
वट सावित्री व्रत 27 मई मंगलवार को मनाना धर्म सम्मत है। 27 मई को सुबह 8 बजकर 33 मिनट तक अमावस्या रहेगी। उल्लेखनीय है कि, पंच गौड़ों के लिए सूर्योदय कालव्यापिनी अमावस्या ग्रहण करने का विधान है और दाक्षिणात्यों के लिए चंद्रोदयव्यापिनी पूर्णिमा ग्रहण की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Vat Savitri Vrat 2025
- फोटो : अमर उजाला
वटसावित्री व्रत का महत्व-
सौभाग्यवती महिलाएं वट की पूजा-अर्चना तथा परिक्रमा पति की दीर्घायु तथा सुख-शांति के लिए करती हैं। इस दिन वटवृक्ष को जल से सींचकर उसमें सूत लपेटते हुए उसकी परिक्रमा की जाती है। पुराणों में लिखा है कि वटवृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में महादेव का वास होता है।
सौभाग्यवती महिलाएं वट की पूजा-अर्चना तथा परिक्रमा पति की दीर्घायु तथा सुख-शांति के लिए करती हैं। इस दिन वटवृक्ष को जल से सींचकर उसमें सूत लपेटते हुए उसकी परिक्रमा की जाती है। पुराणों में लिखा है कि वटवृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में महादेव का वास होता है।
विज्ञापन
Vat Savitri Vrat 2025
- फोटो : अमर उजाला
इस प्रकार इस पवित्र वृक्ष में सृष्टि के सृजन, पालन और संहार करने वाले त्रिदेवों की दिव्य ऊर्जा का अक्षय भंडार उपलब्ध होता है। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दिन पूजा-अर्चना करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। वटसावित्री व्रत में वटवृक्ष का पूजन सूर्योदय व्यापनी अमावस्या में ही प्रातः काल ही करना चाहिए तभी इसका फल प्राप्त होता है।
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
Vat Savitri Vrat 2025: दुर्लभ और शुभ संयोग में रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, जानें सही तिथि, शुभ संयोग और महत्व
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।