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Som Pradosh Vrat 2025: 3 या 4 नवंबर सोम प्रदोष व्रत कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Tue, 28 Oct 2025 07:15 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 28 Oct 2025 07:15 PM IST
सार

Pradosh Vrat November 2025: त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति मिलती है। नवंबर का पहला सोम प्रदोष व्रत 3 नवंबर को है, जो मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
 

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Som Pradosh Vrat 2025 Kab Hai 3 or 4 November Puja Shubh Muhurat and Rules in Hindi
Som Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला

Som Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि आती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन शिव-पार्वती की आराधना करने से सभी प्रकार के रोग, दोष और कष्ट दूर हो जाते हैं। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उत्थान और मनोकामना पूर्ति का शुभ अवसर होता है।


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जब त्रयोदशी तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत फलदायी अवसर माना जाता है। नवंबर माह का पहला सोम प्रदोष व्रत 3 नवंबर, सोमवार को पड़ेगा। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और समृद्धि प्रदान करते हैं।
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Som Pradosh Vrat 2025 Kab Hai 3 or 4 November Puja Shubh Muhurat and Rules in Hindi
Ravi Pradosh Vrat 2025 - फोटो : freepik

सोम प्रदोष व्रत तिथि और मुहूर्त
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत इस बार 3 नवंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, त्रयोदशी तिथि 3 नवंबर को सुबह 5:07 बजे शुरू होकर 4 नवंबर को सुबह 2:05 बजे समाप्त होगी। भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है।

Som Pradosh Vrat 2025 Kab Hai 3 or 4 November Puja Shubh Muhurat and Rules in Hindi
इस समय की जाती है प्रदोष व्रत की पूजा - फोटो : adobe stock

इस समय की जाती है प्रदोष व्रत की पूजा
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले, यानी प्रदोष काल में की जाती है। इस समय पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस बार प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:34 बजे से रात 8:11 बजे तक रहेगा, जिसकी कुल अवधि लगभग 2 घंटे 36 मिनट होगी।

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प्रदोष व्रत की पूजा विधि - फोटो : Instagram

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठें और स्नान कर स्वच्छ, साफ वस्त्र धारण करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • शाम के समय पुनः स्नान करें और पूजन स्थल को शुद्ध करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या शिवलिंग को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
  • गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और गन्ने के रस से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें।
  • भगवान शिव को चंदन, बेला के फूल, भांग, धतूरा और शमी के पत्ते अर्पित करें ।
  • रुद्राक्ष की माला से “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • प्रदोष व्रत कथा को श्रद्धापूर्वक पढ़ें या सुनें।
  • पूजन के बाद आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।

 

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इस समय की जाती है प्रदोष व्रत की पूजा - फोटो : freepik

प्रदोष व्रत का महत्व 
जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों को सुख, समृद्धि और संतोष का आशीर्वाद देते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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