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Shani Jayanti 2025: साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति पाने के लिए शनि जयंती पर करें ये उपाय

Thu, 17 Apr 2025 12:50 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा कुमारी Updated Thu, 17 Apr 2025 12:50 PM IST
सार

Shani Jayanti 2025: शनि जयंती हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, इसे न्याय के देवता शनि की कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ व दान करने से सभी ग्रह दोषों से मुक्ति प्राप्त होती हैं।

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Shani Jayanti 2025 Date and Importance know Shani Sade Sati Upay in hindi
Shani Jayanti 2025 - फोटो : adobe stock

Shani Jayanti 2025: शनि जयंती हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, इसे न्याय के देवता शनि की कृपा पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा-पाठ व दान करने से सभी ग्रह दोषों से मुक्ति प्राप्त होती हैं। वहीं शनि जयंती पर शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाने से कार्यों में आ रही बाधाएं, मानसिक तनाव व कर्ज से छुटकारा मिलता है। पंचांग के मुताबिक हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। इस दिन कर्मफलदाता शनिदेव का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन सभी धार्मिक स्थलों पर उनकी पूजा का भव्य आयोजन किया जाता है।



इस बार 27 मई 2025 को शनि जयंती का महापर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के मुताबिक यह दिन शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या से गुजर रहे लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस तिथि पर उपासना-उपवास करने से साढ़ेसाती-ढैय्या का प्रभाव कम होता है। इस दौरान शनि चालीसा का पाठ करने से शनिदेव की विशेष कृपा भी मिलती हैं। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली चालीसा के बारे में जानते हैं....

Shani Jayanti 2025 Date and Importance know Shani Sade Sati Upay in hindi
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि प्रारंभ: 26 मई , सोमवार, दोपहर 12:11 मिनट पर - फोटो : अमर उजाला

शनि जयंती तिथि 

  • पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि प्रारंभ: 26 मई , सोमवार, दोपहर 12:11 मिनट पर
  • ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि समाप्त: 27 मई , मंगलवार, रात्रि 8: 31 मिनट पर
  • उदयातिथि के अनुसार शनि जयंती 27 मई 2025, मंगलवार को मनाई जाएगी।
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इस बार 27 मई 2025 को शनि जयंती का महापर्व मनाया जाएगा। - फोटो : freepik
शुभ योग
इस बार 27 मई 2025 को शनि जयंती का महापर्व मनाया जाएगा। इस दिन कृत्तिका व रोहिणी नक्षत्र बन रहा है, जिसपर सुकर्मा योग का संयोग रहेगा।
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शनि चालीसा - फोटो : अमर उजाला

शनि चालीसा

दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥


चौपाई

जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥


परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥


कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥

पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥


सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥

जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥


पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥

राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥


बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥

लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥


रावण की गति-मति बौराई। रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई॥

दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥


नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥

हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥


भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥

विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥


हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥

तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥


श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥

तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥


पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥

कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥


रवि कहँ मुख महँ धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥

शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥


वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥

जम्बुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥


गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥

गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥


जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥


तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चाँदी अरु तामा॥

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥


समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥

जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥


अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥


पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥


दोहा

पाठ शनिश्चर देव को, की हों ‘भक्त’ तैयार।
करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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