Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को महादेव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस तिथि पर शिवलिंग पर केवल जल और बेलपत्र चढ़ाने से साधक के कष्ट दूर होते हैं। यही नहीं व्यक्ति मानसिक रूप से भी स्वस्थ महसूस करता है। यह व्रत हर माह के शुक्ल व कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। हालांकि सावन में पड़ने वाली त्रयोदशी सभी में खास है, क्योंकि यह महादेव का प्रिय माह है। इस समय प्रदोष रखने से साधक को आध्यात्मिक लाभ सहित कर्ज, रोग और तनाव से भी मुक्ति मिलती हैं। चूंकि सावन में देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न शिव जी ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था, इसलिए यह समय प्रभु की कृपा पाने का शानदार अवसर है। इस दौरान 22 जुलाई को सावन का पहला प्रदोष व्रत रखा जा चुका है। परंतु अतिंम प्रदोष कब है, आइए जानते हैं
Pradosh Vrat 2025: कब है सावन का अंतिम प्रदोष व्रत ? जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Tue, 29 Jul 2025 05:56 PM IST
सार
Pradosh Vrat 2025: इस साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 6 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 08 मिनट पर होगी। इसका समापन 7 अगस्त को दोपहर 02 बजकर 27 मिनट पर होगा।
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