सावन का पावन माह आज से प्रारंभ हो गया है। सावन आते ही शिवभक्तों में एक गजब का उत्साह और उमंग देखने को मिलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह माह शिवजी को बेहद प्रिय है। इस महीने भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा की जाती है। श्रावण मास में भगवान शिव शंकर को गंगा जल से अभिषेक किया जाता है। हजारों लाखों शिव भक्त इस महीने भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं। कंधे में कांवर रखकर शिवजी का स्मरण करते हुए कई किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं। हालांकि कोरोना काल के चलते ऐसा नजारा कम देखने को मिलेगा। मान्यता है कि जो कोई भक्त इस महीने भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करता है उसे भोले बाबा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उसकी समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। भक्तों के सारे पाप मिट जाते हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के पावन माह सावन में कैसे उनकी आराधना करें।
Sawan 2021: सावन माह आज से प्रारंभ, पूजा विधि, महत्व, सावन सोमवार व्रत की तिथियां जानें सबकुछ
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सुबह दिन जल्दी उठकर स्नान करें। शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही माता पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं। पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें। शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं और सभी को तिलक लगाएं। प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं। धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें। अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
सोमवार भगवान शिव का दिन होता है और सावन में पड़ने वाले सोमवार के दिन का महत्व अधिक बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार व्रत मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस बार सावन में 4 सोमवार व्रत पड़ेंगे। सावन सोमवार व्रत 2021 की तिथियां-
| दिन | तारीख |
| सावन का पहला सोमवार | 26 जुलाई |
| सावन का दूसरा सोमवार | 02 अगस्त |
| सावन का तीसरा सोमवार | 09 अगस्त |
| सावन का चौथा सोमवार | 16 अगस्त |
पौराणिक कथा के अनुसार, कहा जाता है। देवासुर संग्राम में समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को कैलाशपति भगवान शिव जी ने पी लिया था। विष के प्रभाव से उनका शरीर बहुत ही ज्यादा गर्म हो गया था जिससे शिवजी को काफी परेशानी होने लगी थी। भगवान शिव को इस परेशानी से बाहर निकालने के लिए इंद्रदेव ने जमकर वर्षा की। कहते हैं कि यह घटनाक्रम सावन के महीने में हुआ था। इस प्रकार से शिव जी ने विषपान करके सृष्टि की रक्षा की थी। तभी से यह मान्यता है कि सावन के महीने में शिव जी अपने भक्तों का कष्ट अति शीघ्र दूर कर देते हैं।
श्रावण के पावन माह में भगवान शिव की पूजा में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। जैसे शिव पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।