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Puri Jagannath Rath Yatra 2021: पुरी भगवान जगन्नाथ रथ आज, जानिए रथ और यात्रा से जुड़ी खास बातें

Mon, 12 Jul 2021 07:12 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 12 Jul 2021 07:12 AM IST
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Puri jagannath rath Yatra 2021 Start On 12 July Know Significance And Facts Of Jagannath Rath Yatra Puri
पुरी रथ यात्रा 2021: इस बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव 12 जुलाई, सोमवार से शुरू हो रहा है। - फोटो : अमर उजाला
Puri Jagannathrath Yatra 2021: हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथजी की पुरी में रथ यात्रा निकाली जाती है। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के अलावा उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा का रथ भी निकाला जाता है। इस रथ यात्रा को लेकर मान्यता है कि एक दिन भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने उनसे द्वारका के दर्शन कराने की प्रार्थना की थी। तब भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन की इच्छा पूर्ति के लिए उन्हें रथ में बिठाकर पूरे नगर का भ्रमण करवाया था और इसके बाद से इस रथयात्रा की शुरुआत हुई थी। जगन्नाथजी की रथ यात्रा के बारे में स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण और ब्रह्म पुराण में भी बताया गया है। इसलिए हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक  मान्यताओं के अनुसार, जो भी व्यक्ति इस रथयात्रा में शामिल होकर इस रथ को खींचता है उसे सौ यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस बार भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का उत्सव 12 जुलाई, सोमवार से शुरू हो रहा है। इस यात्रा से जुड़ी कई रोचक बातें हैं,जिसे आपको जरूर जानना चाहिए।
Puri jagannath rath Yatra 2021 Start On 12 July Know Significance And Facts Of Jagannath Rath Yatra Puri
jagannath Rath Yatra - फोटो : PTI

कैसे होते हैं भगवान के रथ
800 साल पुराने इस मंदिर में भगवान कृष्ण को जगत के नाथ जगन्नाथजी के रूप में पूजा जाता है और इनके साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा भी विराजमान हैं। रथयात्रा में तीनों ही देवों के रथ निकलते हैं। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के साथ भाई बलराम और बहन सुभद्रा के लिए अलग-अलग रथ होते हैं और इन रथों को बनाने की शुरुआत अक्षय तृतीया से होती है। रथयात्रा में सबसे आगे बलराम और बीच में बहन सुभद्रा का रथ रहता है। सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ का रथ होता है। सभी के रथ अलग-अलग रंग और ऊंचाई के होते हैं। 

Puri jagannath rath Yatra 2021 Start On 12 July Know Significance And Facts Of Jagannath Rath Yatra Puri
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई

भगवान बलरामजी के रथ को 'तालध्वज' कहा जाता है और इसकी पहचान लाल और हरे रंग से होती है। वहीं सुभद्रा के रथ का नाम 'दर्पदलन' अथवा ‘पद्म रथ’ है,उनके रथ का रंग काला या नीले रंग को होता है, जिसमें लाल रंग भी होता है। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष अथवा गरुड़ध्वज कहा जाता है, इनका रथ लाल और पीले रंग का होता है। 

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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई

रथ हमेशा नीम की लकड़ी से बनाया जाता है, क्योंकि ये औषधीय लकड़ी होने के साथ पवित्र भी मानी जाती है। हर साल बनने वाले ये रथ एक समान ऊंचाई के ही बनाए जाते हैं। इसमें भगवान जगन्नाथ का रथ 45.6 फीट ऊंचा, बलराम का रथ 45 फीट और देवी सुभद्रा का रथ 44.6 फीट ऊंचा होता है। 

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भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : पीटीआई

भगवान के रथ में एक भी कील या कांटे आदि का प्रयोग नहीं होता। यहां तक की कोई धातु भी रथ में नहीं लगाई जाती है। रथ की लकड़ी का चयन बसंत पंचमी के दिन और रथ बनाने की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन से होती है।

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