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Papankusha Ekadashi 2020 Date: पापाकुंशा एकादशी आज, जानिए महत्व और पूजा विधि

Tue, 27 Oct 2020 07:09 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 27 Oct 2020 07:09 AM IST
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Papankusha Ekadashi vrat 2020 date importance and puja vidhi
पापाकुंशा एकादशी

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। हर माह में दो एकादशी का व्रत रखा जाता है। एकदशी व्रत में भगवान विष्णु की विशेष आराधना और पूजा पाठ किया जाता है। 27 अक्तूबर को अश्विन माह की पापाकुंशा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार पापाकुंशा एकादशी व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आती है। एकादशी में उपवास, पूजा-पाठ, कीर्तन और भगवान विष्णु का नाम जप करने से बहुत ही शुभफलदायक माना गया है। इस एकादशी का व्रत रखने से और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति के सभी जाने -अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। इस व्रत को करने से मन और आत्मा दोनों शुद्ध होते हैं।



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Papankusha Ekadashi vrat 2020 date importance and puja vidhi
उत्पन्ना एकादशी

पापाकुंशा एकादशी एक हजार अश्वमेघ और सौ सूर्ययज्ञ करने के समान फल प्रदान करने वाली होती है। इस एकादशी व्रत के समान अन्य कोई व्रत नहीं है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इस एकादशी की रात्रि में जागरण करता है वह स्वर्ग का अधिकारी बनता है। इस एकादशी के दिन दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, उसे यमराज के दर्शन नहीं होते।

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भगवान विष्णु

भगवान पद्मनाभ होंगे प्रसन्न
पापांकुशा एकादशी पर भगवान विष्णु के दिव्य रूप की पूजा की जाती है। एकादशी तिथि के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कार्य करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। भगवान विष्णु को चन्दन, अक्षत, मोली,फल, फूल,मेवा आदि अर्पित करें। इसके बाद एकादशी की कथा सुननी चाहिए,एवं 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जितना संभव हो जप करें एवं भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारनी चाहिए।

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पापाकुंशा एकादशी की कथा
प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर एक क्रूर बहेलियां रहता था। उसने अपनी सारी जिंदगी हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और गलत संगति में व्यतीत कर दी। जब उसका अंतिम समय आया तब यमराज के दूत बहेलिये को लेने आए और यमदूत ने बहेलिये से कहा कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है हम तुम्हें कल लेने आएंगे। यह बात सुनकर बहेलिया बहुत भयभीत हो गया और महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और महर्षि अंगिरा के चरणों पर गिरकर प्रार्थना करने लगा। महर्षि अंगिरा ने बहेलिये से प्रसन्न होकर कहा कि तुम अगले दिन ही आने वाली आश्विन शुक्ल एकादशी का विधि पूर्वक व्रत करना। बहेलिये ने महर्षि अंगिरा के बताए हुए विधान से विधि पूर्वक पापांकुशा एकादशी का व्रत करा और इस व्रत पूजन के बल से भगवान की कृपा से वह विष्णु लोक को गया। जब यमराज के यमदूत ने इस चमत्कार को देखा तो वह बहेलिया को बिना लिए ही यमलोक वापस लौट गए।

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