Navratri 2022 Durga Saptashati Benefits: नवरात्रि पर विशेष रूप से मां दुर्गा की पूजा-उपासना और मंत्रोचार में दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व होता है। दुर्गा सप्तशती में कुछ ऐसे मंत्र हैं जिनका जाप करने पर मां के आशीर्वाद के साथ जीवन के कई कष्ट खत्म हो जाते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के नौ दिन महाशक्ति की पूजा और उपासना के दिन होते हैं और इन दिनों दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में मां अपने भक्तों के कल्याण के लिए धरती पर आती हैं। नवरात्रि पर दुर्गा उपासना,पूजा,उपवास और मंत्रों के जाप का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार,नवरात्रि में कुछ मंत्रों का जाप करने से मां दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नौ दिन इन मंत्रों का जाप करना आपके लिए बेहद लाभकारी होगा।
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Durga Saptashati Path Benefits: दुर्गा सप्तशती के महत्वपूर्ण मंत्र,नवरात्रि पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप
Sun, 25 Sep 2022 11:43 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 25 Sep 2022 11:43 AM IST
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नवरात्रि 2022 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
नवरात्रि 2022 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
दुर्गा सप्तशती के कुछ महत्वपूर्ण मंत्र
कार्यबाधा निवारण के लिए-
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
कार्यबाधा निवारण के लिए-
ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।
नवरात्रि 2022 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
संकट से मुक्ति के लिए-
रक्तबीजवधे देवी चण्डमुण्ड विनाशनी।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
रक्तबीजवधे देवी चण्डमुण्ड विनाशनी।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
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नवरात्रि 2022 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
व्याधिमुक्ति के लिए-
स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
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नवरात्रि 2022 शुभकामना
- फोटो : amar ujala
शीघ्र विवाह के लिए-
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।
तारिणी दुर्ग संसार सागरस्य कुलोभ्दवाम्।।
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्।
तारिणी दुर्ग संसार सागरस्य कुलोभ्दवाम्।।