हिंदू धर्म के मान्यताओं के अनुसार, नागों की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब देवता और दानव मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे, तब उसमें से अमृत के साथ-साथ कई विषैले पदार्थ भी निकले थे। इन विषैले पदार्थों को पीने से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया था, यही कारण है कि भोलेनाथ को नीलकंठ भी कहा जाता है। आपने देखा होगा कि शिवलिंग पर जल दिया जाता है। भगवान शंकर को जल और दूध चढ़ाने के पीछे भी एक मान्यता है। विष पीने के बाद भगवान शंकर का शरीर बहुत गर्म हो गया था, उसी को ठंडा रखने के लिए उन्हें जल चढ़ाया जाता है। साथ ही सांप एक जानवर है जिसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए विष के प्रभाव को कम करने के लिए सांप को गले में लपेट लिया था।
Nag Panchami 2024: नागपंचमी के दिन भूलकर ना करें ये काम, मानें जाते हैं अशुभ और आती है दरिद्रता
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिखर बरनवाल
Updated Mon, 29 Jul 2024 05:48 PM IST
सार
इस साल नागपंचमी का त्योहार 09 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नागपंचमी के दिन कुछ कार्य भूलकर भी नहीं करना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन