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Nag Panchami 2024: कब है नागपंचमी ? जानें तिथि, मुहू्र्त और पूजा विधि

Wed, 26 Jun 2024 12:14 PM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 26 Jun 2024 12:14 PM IST
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Nag Panchami 2024 tithi muhurt Know the date time and method of worship in hindi
नाग पंचमी - फोटो : Amar Ujala

Nag Panchami 2024: हिंदू धर्म में नाग पंचमी सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। भारत, नेपाल और हिंदू आबादी वाले अन्य दक्षिण एशियाई देशों में लोग इस त्योहार पर नाग की पूजा करते हैं। नाग पंचमी श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से इस बार नाग पंचमी 09 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी। नाग पंचमी का एक ऐसा त्योहार जो देशभर के लगभग सभी राज्यों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक शक्ति, मनोवांछित फल और अपार धन की प्राप्ति होती है। इसलिए आइए लेख में जानते हैं कि नाग पंचमी तिथि क्या है?, नाग पंचमी पूजा मुहूर्त कितने बजे से हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि नाग पंचमी त्योहार का क्या महत्व होता है।

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नाग पंचमी तिथि 
हिंदू पंचांग के अनुसार, नाग पंचमी का त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचम तिथि को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से इस साल ये तारीख 09 अगस्त 2024 को है। पंचमी तिथि की शुरुआत 9 अगस्त को मध्य रात्रि 12:36 से 10 अगस्त प्रातः 03:14 पर समाप्त होगी।
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नाग पंचमी पूजा मुहूर्त
नाग पंचमी की पूजा मुहूर्त की बात की जाए तो इस साल के श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचम तिथि यानी 09 अगस्त 2024 को सुबह 05:47 से 08:26 तक रहेगा। कुल मिलाकर 2 घंटे 39 मिनट के लिए पूजा का मुहूर्त है।
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नाग पंचमी पूजा विधि
नाग पंचमी के दिन सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्मों से मुक्त हो लें, फिर स्नान करें। इसके बाद शिव जी के साथ-साथ नाग देवता की पूजा करें। नाग देवता की पूजा में फल, फूल, मिठाई और दूध अर्पित करें। मान्यताओं के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या फिर राहु-केतु से संबंधित कोई दोष हो तो नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा जरूर करनी चाहिए।

नाग पंचमी का महत्व
नाग पंचमी का त्योहार नागों, सांपों की पूजा के लिए समर्पित है। महाभारत में, राजा जनमेजय ने अपने पिता राजा परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए नागों का नरसंहार करने के लिए यज्ञ शुरू किया था। ऋषि आस्तिक ने नागों को बचाने के लिए हस्तक्षेप किया और यज्ञ रोकने में सफल रहे। यज्ञ रुकने का दिन पंचमी तिथि था, जो आज नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में, नागों को अत्यंत पूजनीय माना जाता है। ऋषियों, देवताओं, और राजाओं को अक्सर नागों के साथ चित्रित किया जाता है। 


नाग पंचमी के दिन, लोग अपने घरों में नाग देवता की पूजा करते हैं, उन्हें दूध, चावल, फूल और मिठाई आदि अर्पित करते हैं। कुछ लोग नागों को भी दूध पिलाते हैं या नाग मंदिरों में दर्शन करने जाते हैं। यह माना जाता है कि नाग पंचमी का त्योहार मनाने से भगवान शिव और नाग देवता प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आरोग्य, समृद्धि और मोक्ष प्रदान करते हैं। यह त्योहार हमें प्रकृति का सम्मान करने और सभी जीवों, चाहे वे कितने ही छोटे या भयानक क्यों न हों, के प्रति दयालु होने का संदेश भी देता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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