माघ मास में पड़ने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। 12 फरवरी दिन शुक्रवार से गुप्त नवरात्रि का आरंभ हो रहा है। इस नवरात्रि में मां आदिशक्ति की दस महाविद्याओं की पूजा का विधान है। गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखती है। गुप्त नवरात्रि की पूजा गुप्त रूप से की जाती है। मां दुर्गा की ये दस महाविद्याएं साधक को कार्य सिद्धि प्रदान करती हैं। गुप्त नवरात्रि में आप भी मां की दस महाविद्याओं का पूजन और मंत्र जाप करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। ये दस विद्याएं इस प्रकार है- काली, तारा, षोडशी, त्रिपुरसुन्दरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगला, मातंगी, कमला। तो चलिए जानते हैं इनके बीज मंत्र....
Magh Gupt Navratri 2021: 12 फरवरी से शुरू हैं गुप्त नवरात्रि, दसमहाविद्याओं की कृपा पाने के लिए करें इन मंत्रों का जाप
मां दुर्गी का दस महाविद्याओं में काली को प्रथम महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। ये साधक को समस्त सिद्धि प्रदान करने वाली हैं। सिद्धि प्राप्ति, विजय प्राप्ति आदि के लिए इनकी पूजा की जाती है। माता काली का स्वाभाव बहुत जी जल्दी रूष्ट और बहुत ही जल्दी प्रसन्न होने वाला है। साधक को एकनिष्ठता और पवित्र मन से इनकी आराधना करनी चाहिए। मां काली की कृपा प्राप्त करने के लिए उक्त मंत्र का जाप करें।
'ॐ क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं दक्षिण कालिके क्रीं क्रीं क्रीं ह्रीं ह्रीं हूं हूं स्वाहा।
इन्हों तांत्रिको की मुख्य देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सर्वप्रथम महर्षि वशिष्ठ ने देवी तारा की आराधना की थी। मान्यताओं के अनुसार इन्ही की आराधना करके महर्षि वशिष्ठ ने सिद्धियां प्राप्त की थी। इनकी आराधना करने से साधक को आर्थिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इनका आराधना मंत्र...
'ॐ ऐं ओं क्रीं क्रीं हूं फट्।'
गुप्त नवरात्रि में दुर्गा की दसमहाविद्याओं में से त्रिपुरासुन्दरी भी एक हैं। दस महाविद्याओं में से ये तीसरी महाविद्या हैं। माता त्रिपुर सुंदरी को ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लीलेशी, लीलेश्वरी, राज राजेश्वरी भी कहा जाता है। इनकी आराधना करने से साधक को हर सफलता की प्राप्ति होती है। गुप्त नवरात्रि के दौरान इस मंत्र के द्वारा मां षोडशी की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है। इनका मंत्र इस प्रकार है।
1. 'श्री ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं क्रीं कए इल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।'
2. ऐं ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:
माता भुवन्श्वरी को शताक्षी और शाकम्भरी नाम से भी जाना जाता है। इनकी पूजा से साधक को सूर्य के तेज समान ऊर्जा की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति के लिए माता भुवनेश्वरी की आराधना बहुत शुभफलदायी मानी जाती है। इनकी पूजा का मंत्र इस प्रकार से है।
'ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ऐं सौ: भुवनेश्वर्ये नम: या ह्रीं।'