Holika Dahan 2023: होलिका में भूलकर भी नहीं जलानी चाहिए इन पेड़ों की लकड़ियां, होता है अनिष्ट
होलिका दहन में इन पेड़ों का न करें इस्तेमाल
होलिका दहन के लिए गलती से भी पीपल के पेड़, शमी का वृक्ष, आम के पेड़, आंवले के पेड़, नीम के पेड़, केले के पेड़, अशोक के पेड़ और बेल के पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल गलती से भी न करें। इन पेड़ों को सनातन धर्म शुभ माना जाता है। इसलिए होलिका दहन में इन पेड़ों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा हरे-भरे पेड़ों का भी होलिका दहन में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
इन पेड़ों का कर सकते हैं इस्तेमाल
होलिका दहन में एरंड और गूलर के पेड़ की लकड़ियों का ही इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो गूलर के पेड़ को भी सनातन धर्म शुभ माना गया है, लेकिन इस मौसम में गूलर के पेड़ की पत्तियां झड़ने लगती हैं। ऐसे में यदि इन वृक्षों की टहनियों को न जलाया जाए तो इसमें कीड़े लगने लगते हैं। इसके अलावा किसी सूखे हुए पेड़ की टहनियों किया जा सकता है।
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उपले और कंडे का करें इस्तेमाल
होलिका दहन में गाय के गोबर के कंडों का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। ऐसा करने से वातावरण भी शुद्ध रहता है। गाय का गोबर पूजा-पाठ में विशेष तौर पर काम में लाया जाता है।
खरपतवार का कर सकते हैं इस्तेमाल
लकड़ियों और उपलों के अलावा खर पतवार को भी होलिका दहन में जलाया जा सकता है। इसकी वजह से अनावश्यक हरे पेड़ों को नहीं काटना पड़ेगा। साथ ही खर पतवार को होलिका में जला देने से आसपास की सफाई भी हो जाएगी।