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Holashtak 2023: होलाष्टक शुरू, जानें इस दौरान क्या करें क्या नहीं

Tue, 28 Feb 2023 07:25 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी
ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 28 Feb 2023 07:25 AM IST
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Holashtak 2023 Date Time Do's and dont during these 9 days in Hindi
27 फरवरी से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक - फोटो : अमर उजाला

Holashtak 2023: होली से पहले के 8 दिन होलाष्टक कहलाते हैं। इस साल होलाष्टक की शुरुआत 27 फरवरी से हो रही है। वैसे तो होलाष्टक 8 दिनों के होते हैं लेकिन इस साल ये 9 दिनों के हैं। ये 27 फरवरी से शुरू होकर 7 मार्च तक चलेंगे। इस वर्ष होलाष्टक आठ नहीं बल्कि नौ दिन के होंगे क्योंकि इस बार फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि 27 फरवरी 2023 को प्रात: 12:59 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं 7 मार्च 2023 को फाल्गुन की पूर्णिमा पर इसकी समाप्ति है। तिथि की वृद्धि होने से ऐसा संयोग बना है। भारतीय मुहूर्त विज्ञान और ज्योतिष शास्त्रानुसार प्रत्येक कार्य शुभ मुहूर्तों का शोधन करके करना चाहिए। यदि कोई भी कार्य शुभ मुहूर्त में किया जाता है तो वह उत्तम फल प्रदान करता है। इस धर्म धुरी से भारतीय भूमि में प्रत्येक कार्य को सुसंस्कृत समय में किया जाता है, अर्थात् ऐसा समय जो उस कार्य की पूर्णता के लिए उपयुक्त हो।इस प्रकार प्रत्येक कार्य की दृष्टि से उसके शुभ समय का निर्धारण किया गया है। 

Holashtak 2023 Date Time Do's and dont during these 9 days in Hindi
27 फरवरी से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक - फोटो : amar ujala

होलाष्टक का अर्थ 
होलाष्टक शब्द होली और अष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है। जिसका भावार्थ होता है होली के आठ दिन। होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक रहता है। अष्टमी तिथि से शुरू होने कारण भी इसे होलाष्टक कहा जाता है। दूसरे शब्दों में हम यह भी कह सकते हैं कि हमें होली आने की पूर्व सूचना होलाष्टक से प्राप्त होती है। इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू हो जाती है। होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते हैं, जिसके कारण शुभ कार्यों का अच्छा फल नहीं मिल पाता है। होलाष्टक प्रारंभ होते ही प्राचीन काल में होलिका दहन वाले स्थान की गोबर, गंगाजल आदि से लिपाई की जाती थी। साथ ही वहां पर होलिका का डंडा लगा दिया जाता था।  जिनमें एक को होलिका और दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है। 

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27 फरवरी से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक - फोटो : अमर उजाला

उग्र रहते हैं ग्रह
होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहू उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्य के निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है जिसके कारण कई बार उससे गलत निर्णय भी हो जाते हैं। इस कारण हानि की आशंका बढ़ जाती है। जिनकी कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा और वृश्चिक राशि के जातक या चंद्र छठे या आठवें भाव में हैं उन्हें इन दिनों अधिक सतर्क रहना चाहिए।

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Holashtak 2023 Date Time Do's and dont during these 9 days in Hindi
27 फरवरी से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक - फोटो : iStock

होलाष्टक में क्या न करें 
इस समय विशेष रूप से विवाह, वाहन खरीद, नए निर्माण व नए कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिए। ऐसा ज्योतिष शास्त्र का कथन है। अर्थात् इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है। होलाष्टक से तात्पर्य है कि होली के 8 दिन पूर्व से है अर्थात धुलंडी से आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत हो जाती है। इन दिनों शुभ कार्य करने की मनाही होती हैं। 

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Holashtak 2023 Date Time Do's and dont during these 9 days in Hindi
27 फरवरी से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक - फोटो : holika dahan varanasi

क्या करते हैं होलाष्टक में 
माघ पूर्णिमा से होली की तैयारियां शुरु हो जाती है। होलाष्टक आरंभ होते ही दो डंडों को स्थापित किया जाता है,इसमें एक होलिका का प्रतीक है और दूसरा प्रह्लाद से संबंधित है। ऐसा माना जाता है कि होलिका से पूर्व 8 दिन दाह-कर्म की तैयारी की जाती है। 

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