Hartalika Teej 2024: हरतालिक तीज अखंड सौभाग्य और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सफल वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हरतालिका तीज मुख्यतौर पर यूपी, बिहार समेत उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में मनाई जाती है। यह व्रत बेहद कठिन होता है, लेकिन हर व्रत की तरह इसमें भी कुछ पूजा सामग्री की जरूरत होती है, जिसके बिना इसे पूरी नहीं माना जाता है। इस साल हरतालिका तीज का व्रत 6 सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि हरतालिक तीज को सफल बनाने के लिए और पूर्ण फल पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज पर पूजा में जरूर शामिल करें ये 3 चीजें, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत
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हरतालिका तीज की पूजा इन तीन चीजों के बिना है अधूरी
1. निर्जला व्रत
हरतालिका तीज में निर्जला व्रत का बहुत बड़ा महत्व होता है। माता पार्वती ने शिव जी को पाने के लिए हजारों वर्ष तक जंगल में जप, तप किया था। हजारों वर्षों तक साधना करने के बाद उनकी मनोकामना पूर्ण हुई थी। यही वजह है कि हरतालिका तीज पर निराहार और निर्जला व्रत रखा जाता है। यह व्रत तीज के सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक चलता है।
2. 16 श्रृंगार
अगर आप हरतालिक तीज मना रही हैं तो इस दिन 16 श्रृंगार का विशेष ध्यान रखें। दरअसल, सौभाग्य का संबंध श्रृंगार से जुड़ा होता है। पूजा के दौरान व्रती महिलाओं को स्वयं भी 16 श्रृंगार करना चाहिए और पूजा में माता गौरी को भी 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए। इसमें सिंदूर, बिंदी, काजल, नथ, मंगलसूत्र, मांग टीका, गजरा, मेंहदी, चूड़ियां, महावर, बिछिया आदि वस्तुएं शामिल होती हैं।
3. दान के लिए वस्त्र
हरतालिक तीज में व्रत और पूजा के साथ ही दान का भी विशेष महत्व है। तीज व्रत करने वाली महिलाओं को कोई नई साड़ी या नया वस्त्र किसी सुहागन महिला या किसी पुरोहित की पत्नी को दान करना चाहिए और कुछ दक्षिणा भी देनी चाहिए।
हरतालिक तीज पूजा सामाग्री
- भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर
- मूर्ति स्थापना के लिए लकड़ी की एक चौकी
- चौकी पर बिछाने के लिए पीला या लाल का वस्त्र
- कलश, आम के पत्ते, केले के पौधे, फूल, माला और जटावाला नारियल
- 16 श्रृंगार की वस्तुएं और दान के लिए वस्त्र
- बेलपत्र, भांग, धतूरा, हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत्, धूप, दीप
- जनेऊ, पान, सुपारी, चंदन, दूर्वा, शहद, घी, कपूर
- गाय का दूध, दही, गंगाजल, नैवेद्य, गंध, मिठाई
- हरतालिक तीज व्रत कथा, और आरती की पुस्तक
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।