Hariyali Teej 2026 Date: हरियाली तीज का पर्व सावन माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और इसका विशेष महत्व सुहागिन महिलाओं के लिए माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। हरियाली तीज के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। इस वर्ष तृतीया तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण व्रत की सही तारीख को लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है।
Hariyali Teej 2026: कब रखा जाएगा हरियाली तीज व्रत? जानें पूजा का शुभ समय और नियम
Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा है। इस वर्ष तृतीया तिथि दो दिनों में पड़ने के कारण व्रत की सही तारीख को लेकर लोगों में भ्रम बना हुआ है। आइए जानते हैं कि हरियाली तीज का व्रत किस दिन रखा जाएगा।
कब है हरियाली तीज 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम 6 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर 15 अगस्त की शाम 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।
ब्रह्म मुहूर्तः सुबह 04:50 से 05:35 तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 से 01:08 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:51 से 03:42 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:06 से 07:29 तक
अमृत काल: रात 08:18 से 09:53 तक
हरियाली तीज 2026 चौघड़िया मुहूर्त
शुभ - उत्तम - 07:29 ए एम से 09:08 ए एम
लाभ - उन्नति- 02:04 पी एम से 03:43 पी एम
अमृत - सर्वोत्तम - 03:43 पी एम से 05:22 पी एम
हरियाली तीज पर शुभ योग
पंचांग के मुताबिक इस वर्ष हरियाली तीज पर शिव योग, सिद्ध योग और रवि योग का संयोग बन रहा है, जो इस दिन के महत्व को और बढ़ा देता है। शिव योग सुबह 7:08 बजे तक रहेगा, इसके बाद सिद्ध योग आरंभ होगा, जबकि रवि योग पूरे दिन प्रभावी रहेगा।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह पर्व प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। कहा जाता है कि माता पार्वती ने कई जन्मों तक तप कर भगवान शिव को प्राप्त किया, जिससे यह व्रत और भी फलदायी माना जाता है।
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