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Hanuman ji Stotra: हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली की कृपा के लिए करें इस महाशक्तिशाली स्तोत्र का पाठ

Wed, 19 Mar 2025 04:54 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 19 Mar 2025 04:54 PM IST
सार

Shree Hanuman Stotra Lyrics: पंचांग के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी, जो कि राम नवमी के ठीक छठे दिन पड़ती है। हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर, श्रद्धालुओं को हनुमान जी की विशेष पूजा करनी चाहिए और उनकी कृपा से सुख-समृद्धि तथा निरोगी काया का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

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Hanuman Janmotsav 2025 Recite the powerful Shri Hanuman Stotra to get rid from the troubles
hanuman stotra ka Paath - फोटो : adobe stock

Hanuman Janmotsav 2025 Date: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान हनुमान का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन हनुमान मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, और भक्तजन हनुमान जी की भक्ति में लीन रहते हैं। पंचांग के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी, जो कि राम नवमी के ठीक छठे दिन पड़ती है।

Hanuman Janmotsav 2025: कब मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव? जानें शुभ मुहूर्त से लेकर पूजन विधि

हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर, श्रद्धालुओं को हनुमान जी की विशेष पूजा करनी चाहिए और उनकी कृपा से सुख-समृद्धि तथा निरोगी काया का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्री हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के समस्त कष्टों का नाश होता है और मंगल ग्रह की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए, इस पावन स्तोत्र का महत्त्व और विधि जानते हैं।

Hanuman Janmotsav 2025 Recite the powerful Shri Hanuman Stotra to get rid from the troubles
hanuman stotra ka Paath - फोटो : adobe stock

श्री हनुमान स्तोत्र पाठ का महत्व
हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह स्तोत्र भगवान हनुमान की असीम शक्ति, भक्ति, और कृपा को आकर्षित करने का एक सशक्त माध्यम है।

Hanuman Janmotsav 2025 Recite the powerful Shri Hanuman Stotra to get rid from the troubles
hanuman stotra ka Paath - फोटो : adobe stock

हनुमान स्तोत्र के लाभ

  • कष्टों का नाश – जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयों और संकटों से मुक्ति मिलती है।
  • मंगल ग्रह की कृपा – जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो, उनके लिए यह पाठ अत्यंत लाभकारी होता है।
  • साहस और आत्मबल – मन में भय, निराशा और तनाव को दूर कर आत्मविश्वास बढ़ाता है।
  • रोगों से मुक्ति – मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए यह पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
  • सफलता और समृद्धि – कार्यों में सफलता प्राप्त होती है और जीवन में समृद्धि आती है।
  • हनुमान जयंती या हर मंगलवार और शनिवार को हनुमान स्तोत्र का पाठ करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के सभी दुख दूर होते हैं।
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Hanuman Janmotsav 2025 Recite the powerful Shri Hanuman Stotra to get rid from the troubles
hanuman stotra ka Paath - फोटो : adobe stock

॥श्री हनुमान स्तोत्र॥
''वन्दे सिन्दूरवर्णाभं लोहिताम्बरभूषितम् ।
रक्ताङ्गरागशोभाढ्यं शोणापुच्छं कपीश्वरम् ॥
सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितं । 
वचस्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न ॥


भजे समीरनन्दनं, सुभक्तचित्तरञ्जनं, दिनेशरूपभक्षकं, समस्तभक्तरक्षकम् ।
सुकण्ठकार्यसाधकं, विपक्षपक्षबाधकं, समुद्रपारगामिनं, नमामि सिद्धकामिनम् ॥१ ॥

सुशङ्कितं सुकण्ठभुक्तवान् हि यो हितं वचस्त्वमाशु धैर्य्यमाश्रयात्र वो भयं कदापि न ।
इति प्लवङ्गनाथभाषितं निशम्य वानराऽधिनाथ आप शं तदा, स रामदूत आश्रयः  ॥ २ ॥

सुदीर्घबाहुलोचनेन, पुच्छगुच्छशोभिना, भुजद्वयेन सोदरीं निजांसयुग्ममास्थितौ ।
कृतौ हि कोसलाधिपौ, कपीशराजसन्निधौ, विदहजेशलक्ष्मणौ, स मे शिवं करोत्वरम् ॥३ ॥

सुशब्दशास्त्रपारगं, विलोक्य रामचन्द्रमाः, कपीश नाथसेवकं, समस्तनीतिमार्गगम् ।
प्रशस्य लक्ष्मणं प्रति, प्रलम्बबाहुभूषितः कपीन्द्रसख्यमाकरोत्, स्वकार्यसाधकः प्रभुः ॥४ ॥

प्रचण्डवेगधारिणं, नगेन्द्रगर्वहारिणं, फणीशमातृगर्वहृद्दृशास्यवासनाशकृत् ।
विभीषणेन सख्यकृद्विदेह जातितापहृत्, सुकण्ठकार्यसाधकं, नमामि यातुधतकम् ॥५ ॥

नमामि पुष्पमौलिनं, सुवर्णवर्णधारिणं गदायुधेन भूषितं, किरीटकुण्डलान्वितम् ।
सुपुच्छगुच्छतुच्छलंकदाहकं सुनायकं विपक्षपक्षराक्षसेन्द्र-सर्ववंशनाशकम् ॥६ ॥

रघूत्तमस्य सेवकं नमामि लक्ष्मणप्रियं दिनेशवंशभूषणस्य मुद्रीकाप्रदर्शकम् ।
विदेहजातिशोकतापहारिणम् प्रहारिणम् सुसूक्ष्मरूपधारिणं नमामि दीर्घरूपिणम् ॥७ ॥

नभस्वदात्मजेन भास्वता त्वया कृता महासहा यता यया द्वयोर्हितं ह्यभूत्स्वकृत्यतः ।
सुकण्ठ आप तारकां रघूत्तमो विदेहजां निपात्य वालिनं प्रभुस्ततो दशाननं खलम् ॥८ ॥

इमं स्तवं कुजेऽह्नि यः पठेत्सुचेतसा नरः कपीशनाथसेवको भुनक्तिसर्वसम्पदः ।
प्लवङ्गराजसत्कृपाकताक्षभाजनस्सदा न शत्रुतो भयं भवेत्कदापि तस्य नुस्त्विह ॥९ ॥

नेत्राङ्गनन्दधरणीवत्सरेऽनङ्गवासरे । लोकेश्वराख्यभट्टेन हनुमत्ताण्डवं कृतम्  ॥ १० ॥
ॐ इति श्री हनुमत्ताण्डव स्तोत्रम्'' ॥

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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