Ganesh Visarjan Niyam: 6 सितंबर 2025 को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर इस वर्ष अंतिम बार घर पर गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा। कई परिवारों में यह परंपरा है कि गणपति मूर्ति का विसर्जन करने के लिए जल को किसी पात्र में भर लिया जाता है। लेकिन अक्सर इस विसर्जन जल को बिना सोच-विचार के इधर-उधर फेंक दिया जाता है, जिससे अनजाने में दोष लगने की संभावना बढ़ जाती है। यह समय है जब हम अपने रीति-रिवाजों को समझदारी से निभाएं और गणेश जी की पूजा-अर्चना के साथ ही विसर्जन जल का सही उपयोग करें।
Ganesh Visarjan 2025: घर पर गणपति विसर्जन के बाद इस पौधे में डालें जल, घर में बनी रहेगी शांति और समृद्धि
Ghar Par Aise Karein Ganpati Visarjan: गणेश विसर्जन के बाद उस जल को किसी खास पौधे में डालने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है। इसलिए इस अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के बाद विसर्जन जल का सही उपयोग करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विसर्जन जल को आक या तुलसी के पौधे में डालें
गणेश विसर्जन के बाद बचा हुआ जल किसी खास पौधे में डालना अत्यंत शुभ माना जाता है। सबसे पहले आता है आक का पौधा, जिसे गणेश जी का वास माना जाता है। विसर्जन जल को आक के पौधे में डालने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसके अलावा, तुलसी का पौधा भी बहुत महत्वपूर्ण है। तुलसी के पौधे में विसर्जन जल डालने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, घर में दरिद्रता दूर होती है और सालभर लक्ष्मी-गणेश जी की कृपा बनी रहती है।
जली हुई रुई की बाती का क्या करें
गणेश जी के विसर्जन के बाद पूजा में जली हुई बाती को कूड़ेदान में फेंकना सही नहीं होता। इसे या तो किसी पवित्र बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए या तुलसी के पौधे के पास की मिट्टी में दबा देना चाहिए। ऐसा करने से पूजा की पवित्रता बनी रहती है और दोष लगने से बचा जा सकता है।
नारियल का विसर्जन और प्रसाद ग्रहण
गणेश विसर्जन के बाद कलश में रखे नारियल को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। इसे नदी या किसी बहते पानी में विसर्जित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, नारियल को किसी वृक्ष की जड़ में दबाना भी एक पवित्र क्रिया है, जिससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गणेश विसर्जन के लिए कुछ खास शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं:
- सुबह 7:36 से 9:10 बजे तक
- दोपहर 12:19 से शाम 5:02 बजे तक
- शाम 6:37 से रात 8:02 बजे तक
इन समयों में गणपति विसर्जन करने से अनंत चतुर्दशी का पर्व और भी पवित्र और शुभ माना जाता है। इन मुहूर्तों का पालन करने से पूजा-अर्चना में अधिक सकारात्मक प्रभाव होता है और घर पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है।
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