Ganesh Chaturthi 2026: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। हालांकि, भारत के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को मनाने की परंपरा एक जैसी नहीं है। महाराष्ट्र में जहां गणेशोत्सव बड़े सार्वजनिक आयोजनों, विशाल पंडालों और भव्य विसर्जन के लिए जाना जाता है, वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में पूजा के साथ स्थानीय परंपराओं और रीति-रिवाजों की खास भूमिका रहती है।गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। आइए जानते हैं कि महाराष्ट्र से लेकर दक्षिण भारत तक गणेश पूजा और उत्सव के तरीके किस तरह अलग हैं और इन परंपराओं के पीछे क्या कारण हैं।
2 of 11
महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?
महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी कैसे मनाई जाती है?
महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी को गणेशोत्सव के नाम से भी जाना जाता है। यहां यह पर्व धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है। घरों में गणपति की प्रतिमा स्थापित करने के अलावा जगह-जगह सार्वजनिक गणेश मंडल बनाए जाते हैं। मुंबई और पुणे जैसे शहरों में बड़े पंडाल, आकर्षक सजावट, भजन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम उत्सव का हिस्सा होते हैं। परिवार अपनी परंपरा के अनुसार गणपति को डेढ़ दिन से लेकर कई दिनों तक घर में विराजमान रखते हैं। इसके बाद प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ढोल-ताशों और भक्ति गीतों के साथ गणपति को विदाई देते हैं।
3 of 11
महाराष्ट्र में मोदक का खास महत्व
- फोटो : Adobe stock
महाराष्ट्र में मोदक का खास महत्व
गणेश पूजा में भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। महाराष्ट्र में उकडीचे मोदक विशेष रूप से लोकप्रिय है। चावल के आटे से तैयार इस मोदक में नारियल और गुड़ की भरावन होती है। इसके अलावा गणपति पूजा के दौरान अलग-अलग परिवारों में अपनी पारंपरिक मिठाइयां और पकवान भी बनाए जाते हैं।
4 of 11
कर्नाटक में गौरी पूजा के बाद गणेश उत्सव
कर्नाटक में गौरी पूजा के बाद गणेश उत्सव
कर्नाटक में गणेश चतुर्थी से जुड़ी एक प्रमुख परंपरा गौरी हब्बा है। आमतौर पर गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले देवी गौरी की पूजा की जाती है और उसके अगले दिन भगवान गणेश की स्थापना होती है। कई परिवारों में गौरी और गणेश की पूजा को एक साथ महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से महिलाएं गौरी पूजा में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं। कर्नाटक में घरों के अलावा मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर भी गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। बेंगलुरु समेत कई शहरों में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
5 of 11
आंध्र प्रदेश में विनायक चविथि की परंपरा
- फोटो : PTI
आंध्र प्रदेश में विनायक चविथि की परंपरा
आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी को विनायक चविथि के नाम से जाना जाता है। इस अवसर पर भगवान विनायक की पूजा घरों और मंदिरों में की जाती है। यहां गणेश पूजा में स्थानीय धार्मिक परंपराओं का प्रभाव देखने को मिलता है। कई मंदिरों में गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। आंध्र प्रदेश में भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंदिर भी हैं, जहां त्योहार के दौरान श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है।