नवरात्रि के नौ दिन भक्ति, अराधना और संयम के होते हैं, साधक, भक्त गण इन नौ दिनों मां की उपासना पूर्ण संयम से करते हैं, भक्तगण नौ दिन मां की आराधना, साधना करते हैं और इसके पश्चात हवन और कन्या पूजन का अनुष्ठान करते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्र में कन्या पूजन का विशेष महत्व है। सनातन धर्म वैसे तो सभी बच्चों में ईश्वर का रूप बताता है किन्तु नवरात्रों में छोटी कन्याओं में माता का रूप बताया गया है।
Chaitra Navratri 2021: कोरोना काल में कैसे करें कन्या पूजन, जानें विधि और उपाय
अष्टमी व नवमी तिथि के दिन तीन से नौ वर्ष की कन्याओं का पूजन किए जाने की परंपरा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात माता का स्वरूप मानी जाती है। छल और कपट से दूर ये कन्याएं पवित्र बताई जाती हैं और कहा जाता है कि जब नवरात्रों में माता पृथ्वी लोक पर आती हैं तो सबसे पहले कन्याओं में ही विराजित होती हैं। इनका सम्मान करना, इन्हें आदर देना ही नवरात्रि में माता की सच्ची उपासना होगी।
शास्त्रानुसार नवरात्रि में एक, तीन, पांच यानि की विषम संख्या में अपनी क्षमता के अनुसार कन्या को घर पर आमंत्रित करना चाहिए। आमंत्रण के पश्चात् उन्हें भोजन करवाना चाहिए। वर्तमान समय में कोरोना के कारण लोग एक-दूसरे के घर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में कन्या को भोजन के लिए आमंत्रित करना मुश्किल है। ऐसे में आप कुछ उपायों को अपनाकर कन्या पूजन भी कर सकते हैं और माता रानी को प्रसन्न कर नवरात्रि अनुष्ठान सफल कर सकते हैं। आइए जानते हैं बिना कन्या या सिर्फ एक कन्या के साथ कैसे किया जा सकता है कन्या पूजन-
घर की बाहर की कन्याओं को इस बार की नवरात्रि में आमंत्रित करना संभव नहीं है, ऐसे में आप घर में ही बेटी या भतीजी के साथ कन्या पूजन कर सकते हैं। घर की बेटियों के साथ कन्या का पूजन करने से पहले मंदिर के सामने दीपक जलाएं और हाथों में थोड़ा सा जल लेकर मां दुर्गा के सामने संकल्प लें कि इस नवरात्रि में आप अपनी बेटी को माता का अंश मानकर कन्या पूजन कर रहे हैं। संकल्प के बाद पानी को पूरे घर में छिड़क दें। इसके बाद विधि अनुसार, कन्या को आसन पर बिठाएं, उसके माथे पर तिलक लगाएं और फिर मीठा भोजन करवाकर उन्हें दान दें।
जिन लोगों के घरों में बेटी न हो वो नवरात्रि में कन्या पूजन के लिए मीठा प्रसाद बनाएं। इसके बाद पूजा स्थान पर माता को भोज लगाकर, दान अर्पित करें। ध्यान रहे, कि माता को वही प्रसाद अर्पित करें जो लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं। ऐसे में आप प्रसाद के तौर पर सूखे मेवे, मखाना, मिसरी को अर्पित कर सकते हैं। माता को प्रसाद अर्पित करके उसे रख लें। बाद में आपको जब भी मौका मिलें। इस प्रसाद को कन्या में बांट दें।