Chaitra Vinayak Chaturthi 2025: हर महीने में चतुर्थी की 2 तिथियां आती है। एक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि जिसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। वहीं शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी कहते हैं। चैत्र माह की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। चूंकि चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष का पहला माह है, इसलिए चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि काफी खास हो जाती है। अगर यह मंगलवार को आती है, तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है, जिसका प्रभाव और भी शक्तिशाली होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और गणपति पूजन से कर्ज, रोग और जीवन की अन्य परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
Vinayak Chaturthi 2025: आज चैत्र माह की अंगारकी चतुर्थी, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Vinayak Chaturthi 2025 Date: चैत्र माह की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। चूंकि चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष का पहला माह है, इसलिए चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि काफी खास हो जाती है। अगर यह मंगलवार को आती है, तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है।
चैत्र विनायक चतुर्थी तिथि व शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2025, सुबह 542 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2025, सुबह 232 बजे
गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 11:10 मिनट से दोपहर 2:00 बजे तक
अंगारकी चतुर्थी का विशेष महत्व
पुराणों के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ था। इसलिए यह दिन गणपति उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। अगर यह तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से है, जिसे साहस, ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंगल ग्रह की अशुभता को दूर करने के लिए इस दिन गणेश जी की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन व्रत रखने और गणेश पूजन करने से कर्ज से मुक्ति, बीमारियों से राहत और घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
व्रत के नियम
- इस दिन नकारात्मक विचारों से बचें और मन को शांत रखें।
- दिनभर गणपति मंत्रों का जाप करें और जरूरतमंदों को अन्न एवं वस्त्र दान करें।
- यदि संभव हो, तो दिनभर निर्जला व्रत करें और केवल फलाहार ग्रहण करें।
- झूठ बोलने और अपशब्द कहने से बचें।
- क्रोध करने और नकारात्मकता फैलाने से बचें।
- बिना नहाए पूजा न करें।
- किसी का अपमान न करें।
अंगारकी चतुर्थी की पूजा विधि
- ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- संभव हो तो इस दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
- जल से शुद्धिकरण करने के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें।
- इसके बाद सिंदूर, गुलाल, चंदन, पुष्प, माला, अक्षत आदि चढ़ाने के बाद 21 दूर्वा चढ़ाएं।
- भगवान गणेश को भोग लगाएं और घी का दीपक के साथ कपूर जलाएं।
- इसके बाद विधिवत तरीके से मंत्र पढ़ने के बाद आरती करें।
- शाम को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद और अर्घ्य देने के बाद करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।