Apara Ekadashi 2020: अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल यह तिथि 18 मई को है। इसलिए अपरा एकादशी का व्रत आज रखा जाएगा। अपरा एकादशी को अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपरा एकादशी का व्रत रखता है उसे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। उनके आशीर्वाद से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
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Apara Ekadashi 2020: अपरा एकादशी आज, जानें मुहूर्त, व्रत विधि और धार्मिक महत्व
Mon, 18 May 2020 08:22 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Mon, 18 May 2020 08:22 AM IST
सार
Apara Ekadashi 2020: अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल यह तिथि 18 मई को पड़ रही है।
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अपरा एकादशी 2020
- फोटो : Rohit Jha
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अपरा एकादशी 2020
- फोटो : अपरा एकादशी 2020
अपरा एकादशी 2020 का मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ - 17 मई 2020 को 12:44 बजे
एकादशी तिथि समाप्त - 18 मई 2020 को 15:08 बजे
अपरा एकादशी पारणा मुहूर्त - 19 मई 2020 को प्रातः 05:27:52 से 08:11:49 बजे तक
अवधि - 2 घंटे 43 मिनट
एकादशी तिथि प्रारंभ - 17 मई 2020 को 12:44 बजे
एकादशी तिथि समाप्त - 18 मई 2020 को 15:08 बजे
अपरा एकादशी पारणा मुहूर्त - 19 मई 2020 को प्रातः 05:27:52 से 08:11:49 बजे तक
अवधि - 2 घंटे 43 मिनट
अपरा एकादशी 2020 व्रत
अपरा एकादशी 20202 व्रत
एकादशी व्रत दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाता है और यह व्रत द्वादशी के दिन समाप्त हो जाता है। व्रत की पूर्व संध्या अर्थात दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें। एक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठें और इस दिन गंगाजल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को भी गंगाजल से स्नान कराएं।
अब पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करें। इसके बाद धूप दीप जलाएं और कलश स्थापित कर मन में जगत के पालनहार का ध्यान करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने दाएं हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना भगवान विष्णु से करें।
पूरे दिन निराहार रहें और भगवान विष्णु का स्मरण करते रहें। संध्या के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाकर उनकी आराधना करें, पूजा के दौरान व्रत कथा सुनें और फिर अगले दिन पारण मुहूर्त में व्रत खोलें। ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें। लोगों व्रत का प्रसाद बांटें।
एकादशी व्रत दशमी तिथि से ही प्रारंभ हो जाता है और यह व्रत द्वादशी के दिन समाप्त हो जाता है। व्रत की पूर्व संध्या अर्थात दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें। एक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को दशमी तिथि के दिन सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठें और इस दिन गंगाजल से स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प करें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को भी गंगाजल से स्नान कराएं।
अब पूर्व दिशा की तरफ एक पटरे पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की फोटो को स्थापित करें। इसके बाद धूप दीप जलाएं और कलश स्थापित कर मन में जगत के पालनहार का ध्यान करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को फल-फूल, पान, सुपारी, नारियल, लौंग आदि अर्पण करें और स्वयं भी पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने दाएं हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना भगवान विष्णु से करें।
पूरे दिन निराहार रहें और भगवान विष्णु का स्मरण करते रहें। संध्या के समय भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने एक गाय के घी का दीपक जलाकर उनकी आराधना करें, पूजा के दौरान व्रत कथा सुनें और फिर अगले दिन पारण मुहूर्त में व्रत खोलें। ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें। लोगों व्रत का प्रसाद बांटें।
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भगवान विष्णु
- फोटो : अमर उजाला।
अपरा एकादशी व्रत के दौरान रखें ये सावधानियां
अपरा एकादशी के दिन व्रत को देर तक नहीं सोना चाहिए।
इस दिन घर पर तामसिक भोजन न बनाएं।
भोजन में लहसुन, प्याज का इस्तेमाल न करें।
आज के दिन घर में चावल न बनाएं, बल्कि द्वादशी के दिन चावल ग्रहण करें।
अपरा एकादशी के दिन व्रत को देर तक नहीं सोना चाहिए।
इस दिन घर पर तामसिक भोजन न बनाएं।
भोजन में लहसुन, प्याज का इस्तेमाल न करें।
आज के दिन घर में चावल न बनाएं, बल्कि द्वादशी के दिन चावल ग्रहण करें।