अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का दिन। इस दिन भगवान के अनंत स्वरूप के लिए व्रत रखने का विधान है। इस दिन अनंत सूत्र बांधा जाता है। स्त्रियां दाएं और पुरुष बाएं हाथ में धारण करते है। मान्यता है कि इसे धारण करते ही सभी दुख और परेशानियां दूर हो जाती हैं। गणेश विसर्जन भी इसी दिन किया जाता है। अनंत चतुर्दशी भादो माह के शुक्ल पक्ष के 14वें दिन मनाई जाती है. इस वर्ष यह 12 सितंबर को है। चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ सुबह 05 बजकर 06 मिनट से हो जाएगा और अगले दिन सुबह 07 बजकर 35 मिनट तक रहेगी।
Anant Chaturthi 2019: जानें पूजा विधि और मंत्रोचार
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हिन्दू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व रहता है। अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सच्चे मन से इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ किया जाए तो धन, उन्नति, खुशहाली और संतान का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस व्रत की पूजा दिन के समय करने का ही विधान है । पूजा विधि इस प्रकार है। स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। उसके बाद मंदिर में कलश स्थापना करें। उसके ऊपर कमल का फूल रखें। अगर आप कलश स्थापना नहीं करना चाहे तो आप विष्णु भगवान की तस्वीर की भी पूजा कर सकते हैं।
हिन्दू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व रहता है। अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सच्चे मन से इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ किया जाए तो धन, उन्नति, खुशहाली और संतान का सौभाग्य प्राप्त होता है।
इस व्रत की पूजा दिन के समय करने का ही विधान है । पूजा विधि इस प्रकार है।स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए। उसके बाद मंदिर में कलश स्थापना करें। उसके ऊपर कमल का फूल रखें। अगर आप कलश स्थापना नहीं करना चाहे तो आप विष्णु भगवान की तस्वीर की भी पूजा कर सकते हैं।
पूजा करते समय इस मंत्र का जप करे -
अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।
पूजा सम्पन्न होने के बाद अनंत सूत्र बांधें और ब्राह्मण को भोज कराएं।