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Ahoi ashtami 2025: अहोई अष्टमी पर क्यों किया जाता है राधा कुंड में स्नान, जानें इससे जुड़ी कथा

Sat, 11 Oct 2025 08:33 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 11 Oct 2025 08:33 AM IST
सार

Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड की पूजा का विशेष महत्व होता है, जब देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां आकर स्नान और आराधना करते हैं। यह कुंड धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है और यहां स्नान करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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Ahoi Ashtami 2025 Date Radha Kund Snan Time Importance and Katha in Hindi
राधा कुंड को विशेष रूप से निःसंतान दंपत्तियों के लिए वरदानकारी माना जाता है। - फोटो : अमर उजाला

Radha Kund Snan Importance: मथुरा अपनी प्रसिद्धि के लिए केवल श्री कृष्ण मंदिरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां का राधा कुंड भी एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। खासकर अहोई अष्टमी के दिन राधा कुंड की पूजा का विशेष महत्व होता है, जब देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां आकर स्नान और आराधना करते हैं। यह कुंड धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है और यहां स्नान करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।


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राधा कुंड को विशेष रूप से निःसंतान दंपत्तियों के लिए वरदानकारी माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि जो दंपत्ति संतान की इच्छा लेकर यहां स्नान करता है, उसकी सूनी गोद भर जाती है और वे संतान प्राप्ति के आशीर्वाद से नवाजे जाते हैं। इस कारण अहोई अष्टमी के दिन मथुरा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है, जो इस पवित्र स्थल की महत्ता को दर्शाता है।
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Ahoi Ashtami 2025 Date Radha Kund Snan Time Importance and Katha in Hindi
राधा कुंड में स्नान का धार्मिक महत्व - फोटो : instagram

राधा कुंड में स्नान का धार्मिक महत्व
राधा कुंड को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है, खासकर अहोई अष्टमी के दिन इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन सुबह-सुबह जो श्रद्धालु राधा कुंड के जल में स्नान करते हैं, उन्हें अहोई माता के साथ-साथ राधा और श्रीकृष्ण का भी विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह स्नान न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और संतान सुख की प्राप्ति का मार्ग भी खोलता है।
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विशेष मान्यता यह भी है कि निःसंतान दंपत्ति जो अहोई अष्टमी के दिन यहां आकर श्रद्धा से स्नान करते हैं, उन्हें संतान का वरदान मिलता है। ऐसे कई दंपत्ति, जिनकी यह मनोकामना पूरी होती है, वे बाद में अपने बच्चों के साथ पुनः राधा कुंड आते हैं और यहां स्नान कराते हुए मुंडन संस्कार भी करते हैं। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी बड़े आस्था से निभाई जाती है।
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Ahoi Ashtami 2025 Date Radha Kund Snan Time Importance and Katha in Hindi
अहोई अष्टमी और राधा कुंड का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व - फोटो : संवाद

अहोई अष्टमी और राधा कुंड का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व

राधा कुंड और श्याम कुंड का संबंध एक महत्वपूर्ण पौराणिक कथा से जुड़ा है। प्राचीन समय में यह क्षेत्र अरिष्ट वन के नाम से जाना जाता था, जहां एक अत्यंत शक्तिशाली राक्षस अरिष्ठासुर का आतंक फैला हुआ था। उसकी दहाड़ इतनी तीव्र और भयावह थी कि गर्भवती महिलाओं का गर्भपात तक हो जाता था। जब कंस ने उसे कृष्ण का वध करने भेजा, तो उसने गाय के बछड़े का रूप धारण किया और बालकृष्ण पर हमला किया।

कृष्ण ने उसकी पहचान कर ली और उसका वध कर दिया। हालांकि, चूंकि उसने गाय के रूप में आए जीव का वध किया था, इस कारण उस पर गौहत्या का पाप लग गया। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए श्रीकृष्ण और राधारानी ने चतुर्थी की रात को दो अलग-अलग कुंडों का निर्माण किया, जिन्हें आज हम श्याम कुंड और राधा कुंड के नाम से जानते हैं।

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Ahoi Ashtami 2025 Date Radha Kund Snan Time Importance and Katha in Hindi
अहोई अष्टमी पर राधा कुंड स्नान की मान्यता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

अहोई अष्टमी पर राधा कुंड स्नान की मान्यता और परंपरा
अहोई अष्टमी व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस दिन विशेष रूप से राधा कुंड में स्नान करने की परंपरा का पालन हजारों की संख्या में श्रद्धालु करते हैं। खासकर जिन दंपत्तियों को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही होती, वे इस दिन यहां आकर स्नान करते हैं और संतान सुख की प्रार्थना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि अहोई अष्टमी पर राधा कुंड का जल अमृत तुल्य होता है और इसमें स्नान करने से पुण्य फल मिलता है। इस दिन कुंड में स्नान करना केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि विश्वास और आस्था का प्रतीक बन गया है। यही कारण है कि अहोई अष्टमी के दिन मथुरा नगरी, विशेषकर राधा कुंड क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जो इस स्थान की पवित्रता और मान्यता को दर्शाती है।
 

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अहोई अष्टमी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

अहोई अष्टमी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का पर्व इस साल 13 अक्तूबर 2025 (सोमवार) को मनाया जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और कल्याण के लिए माताओं द्वारा रखा जाता है। अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 अक्तूबर की रात 12 बजकर 24 मिनट पर होगी, और इसका समापन 14 अक्तूबर की रात 11 बजकर 9 मिनट पर होगा। चूंकि उदया तिथि 13 अक्तूबर को ही है, इसलिए अहोई अष्टमी इसी दिन मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:53 बजे से लेकर 7:08 बजे तक रहेगा। इस समय के दौरान माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और संतान की कुशलता व सुखद भविष्य की कामना करती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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