Syahu Mala Significance: हर साल कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को महिलाएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। यह व्रत करवा चौथ की तरह ही पूरे दिन निर्जला यानी बिना पानी पिए किया जाता है। इस दिन न सिर्फ माताएं, बल्कि वे महिलाएं भी व्रत रखती हैं जो संतान की प्राप्ति की कामना करती हैं।
Ahoi Ashtami 2025: संतान सुरक्षा के लिए माताएं क्यों पहनती हैं स्याहु माता की माला, जानें इसका धार्मिक महत्व
Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी पर स्याहु माला संतान की रक्षा और लंबी उम्र की कामना का प्रतीक होती है। यह माला व्रत की पवित्रता और श्रद्धा को दर्शाती है।
स्याहु माला क्या होती है?
अहोई अष्टमी के व्रत में स्याहु माला का खास महत्व होता है। यह माला आमतौर पर चांदी की बनी होती है, जिसमें चांदी की छोटी-छोटी मोतियों को एक लॉकेट के साथ कलावे (लाल धागे) में पिरोया जाता है। जो महिलाएं संतान की लंबी उम्र की कामना से अहोई व्रत रखती हैं, वे इस माला को विशेष रूप से धारण करती हैं। पूजा के समय इस माला की रोली, अक्षत और दूध-भात से पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस माला को दिवाली तक पहनना शुभ होता है और इससे संतान की उम्र लंबी व जीवन सुखमय बना रहता है। अहोई पूजन में इस माला को पहनने से पहले महिलाएं विधिपूर्वक इसकी पूजा करती हैं, जिससे इसका पूर्ण फल प्राप्त हो सके। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे श्रद्धा के साथ निभाया जाता है।
स्याहु माता की पूजा विधि
- अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं (बिना जल व अन्न के)।
- पूजा के लिए घर के मंदिर में या दीवार पर अहोई माता की तस्वीर लगाएं।
- एक मिट्टी का घड़ा (या कलश) लेकर उसमें पानी भरें और तस्वीर के पास रखें।
- स्याहु माला को अहोई माता की तस्वीर पर अर्पित करें।
- पूजा के समय संतान को पास बिठाना शुभ माना जाता है।
- सबसे पहले अहोई माता को तिलक लगाएं, फिर स्याहु माला के लॉकेट पर तिलक करें।
- इसके बाद वह माला गले में धारण करें।
- पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को तारों को अर्घ्य दें और फिर व्रत का पारण करें।
- स्याहु माला को दिवाली तक पहन कर रखें, फिर उसे संभाल कर रख लें।
- घड़े में रखा जल दिवाली के दिन संतान को स्नान कराने के लिए प्रयोग करें।
- मान्यता है कि यह पूजा संतान को लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद देती है।
अहोई अष्टमी 2025 कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से वे महिलाएं करती हैं जो संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस साल अष्टमी तिथि 13 अक्तूबर 2025 को दोपहर 12:24 बजे शुरू होकर 14 अक्तूबर की सुबह 11:09 बजे तक रहेगी। उदयकाल की तिथि को मान्यता दी जाती है, इसलिए इस बार अहोई अष्टमी का व्रत सोमवार, 13 अक्तूबर 2025 को रखा जाएगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।