सावन के महीने में अगर आप कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो सफर के दौरान कुछ सावधानियां जरूर बरतें। अगर इन्हें इग्नोर किया तो शिवजी नाराज भी हो सकते हैं।
सावन के महीने में माना जाता है कि भगवान शिव का जलाभिषेक करने से शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करते हैं। इसलिए सावन के महीने में शिवभक्त गंगाजल लाने और उससे शिवलिंग का अभिषेक करवाने के लिए कांवड़ यात्रा पर जाते हैं। वे यह पूरा सफर पैदल और नंगे पांव करते हैं।
वहीं, कांवड़ यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं, जिन्हें पूरा न करना अशुभ माना जाता है। जैसे कांवड़ यात्रा शुरू करते ही कावड़ियों के लिए किसी भी प्रकार का नशा करना वर्जित होता है। यात्रा पूरी होने तक उस व्यक्ति को मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करना होता है।
बिना स्नान किए कावड़ को हाथ नहीं लगा सकते, इसलिए स्नान करने के बाद ही कावड़िए अपने कावड़ को छू सकते हैं। एक महंत के अनुसार, चमड़े की किसी वस्तु का स्पर्श, वाहन का प्रयोग, चारपाई का उपयोग, ये सब कावड़ियों के लिए वर्जित कार्य है। इसके अलावा किसी वृक्ष या पौधे के नीचे भी कावड़ को रखना वर्जित है।
कावड़ ले जाने के पूरे रास्ते भर बोल बम और जय शिव-शंकर का उच्चारण करना फलदायी होता है। कावड़ को अपने सिर के ऊपर से लेकर जाना भी वर्जित माना गया है। इन सभी नियमों का पालन करना जरूरी है और इसके लिए कावड़ियों की संकल्पशक्ति की मजबूती होनी चाहिए। कहा जाता है कि जो शिवभक्त ऐसा नहीं करते हैं उनकी मनोकामना पूरी नहीं होती है।