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भाजपा नेता शांता कुमार बोले- सोनिया की मोदी को 2004 की नसीहत गलत नहीं

Sun, 14 Apr 2019 03:05 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 14 Apr 2019 03:05 PM IST
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lok sabha election 2019 BJP Leader Shanta Kumar Exclusive Interview
फाइल फोटो

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मार्गदर्शक मंडल के सदस्य रहे शांता कुमार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टीस एक बार फिर सामने आई। उनका कहना है कि कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2004 को याद रखने की दी नसीहत गलत नहीं है। अमर उजाला के धर्मशाला कार्यालय में विशेष बातचीत में शांता ने कहा कि सोनिया की नसीहत को वह खुद कई दिन से पार्टी से कह रहे हैं।

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वर्ष 2004 में भी कहा जाता था कि अटल बिहारी वाजपेयी का कोई विकल्प नहीं है, लेकिन फिर भी भाजपा हारी। वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी कोई विकल्प नहीं है, यह सच है, लेकिन चुनाव में जीत-हार के लिए कभी एक फैक्टर जिम्मेदार नहीं होता। हालांकि, चुनावी तैयारी में कांग्रेस बहुत पीछे रह चुकी है। लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें हारने पर क्या मुख्यमंत्री की कुर्सी जाएगी? इस सवाल पर शांता ने कहा कि जयराम ठाकुर पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे। इस चुनाव में जातीय कार्ड नहीं चलेगा।

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lok sabha election 2019 BJP Leader Shanta Kumar Exclusive Interview
फाइल फोटो

लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी जैसे बुजुर्ग नेताओं को हाशिये पर धकेलने के सवाल पर शांता कुमार ने कहा कि इनको भी मेरी तरह अब चुनाव लड़वाने का आनंद लेना चाहिए। मैंने हर परिस्थिति में अपने कर्त्तव्य को ध्यान में रखते हुए काम किया है। गीता पढ़ी तो बहुतों ने होगी, मगर हमने इसे जीया है।

अपनी आत्मकथा पर शांता ने कहा कि पार्टी के शुरुआती संघर्ष और पुराने लोगों का इतिहास कहीं समाप्त न हो जाए, इसलिए आत्मकथा लिख रहा हूं। अयोध्या मामले से लेकर वर्ष 2004 में मेरे केंद्रीय मंत्री के पद से त्यागपत्र देने जैसे कई पहलू आत्मकथा में होंगे। अब मैं लेखक पहले, राजनेता बाद में हूं।

शांता ने कहा कि किशोरावस्था में ही मेरा मन था कि मैं जीवन भर आरएसएस का प्रचारक बना रहूं। बैजनाथ के कृष्णानगर में शिक्षक की नौकरी लगे 17 दिन हुए थे। कश्मीर आंदोलन शुरू हो गया। संघ की ओर से मुझे कांगड़ा का जत्था लेकर कश्मीर जाने के आदेश हुए। घर में बहन बीमार थी। डॉक्टर ने उसे टमाटर ज्यादा खिलाने को कहा था। बहन ने मुझसे टमाटर मंगवाए थे। मैं स्कूल के बजाय सीधा कश्मीर चला गया। परिजनों को लगा कि मैं स्कूल गया हूं। 8 महीने की जेल काटने के बाद मैं घर पहुंचा।

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