राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ फोर्ट के भीतर मुस्लिम समाज द्वारा ताजिया निकालने को लेकर हिंदू संगठनों के आव्हान पर केलवाड़ा कस्बा पांच जुलाई तक बंद रहेगा। आज शुक्रवार को भी कस्बा पूरी तरह बंद रहा, हालांकि कुछ जरूरत की दुकानें खुली रहीं। इससे पहले गुरुवार को केलवाड़ा की सड़कों पर जगह-जगह टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया।
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बंद के कारण नहीं खुली दुकानें।
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, कुंभलगढ़ दुर्ग भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन है। यहां से लंबे समय से समुदाय विशेष द्वारा ताजिए निकाले जा रहे हैं, जिनकी अनुमति भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा दी जाती है। जिसे लेकर कई बार हिंदू संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं। पांच जुलाई को यहां से एक बार फिर ताजिए निकाले जाने हैं, जिसे लेकर हिंदू संगठन विरोध जता रहे हैं। गुरुवार को आक्रोशित हिंदू संगठन के लोग कुंभलगढ़ दुर्ग की ओर रवाना हुए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने नाकेबंदी करते हुए लगभग 200 पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया था। इसके बाद भी प्रदर्शनकारी नाकेबंदी तोड़कर आगे बढ़ गए। इस दौरान कुंभलगढ़ विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत कर आश्वासन दिया कि उनकी सभी जायज मांगें पूरी की जाएंगी। सभी लोग शांति बनाए रखें। उन्होंने लोगों से कहा- 'मैं आप सभी के साथ हूं। आपकी बात सरकार तक पहुंचा दी है, शीघ्र समाधान होगा। अभी तलवार निकालने की जरूरत नहीं, कलम से काम हो रहा है। जरूरत पड़ी तो तलवार भी निकलेगी। अगर, कार्रवाई नहीं हुई तो मैं विधायक पद से इस्तीफा देकर आप सभी के साथ बैठ जाऊंगा। मुझे विधायक पद पर रहने की कोई आवश्यकता नहीं है'।
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हिंदू संगठनों का विरोध जारी।
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पुलिस अधिकारी मौके पर
इस दौरान कुंभलगढ़ दुर्ग पर एडीएम राजसमंद बृजमोहन गुप्ता, एडिशनल एसपी रजत विश्नोई और महेंद्र पारीक, डीवाईएसपी ज्ञानेंद्र सिंह, सीआई सुरेंद्र सिंह (साइबर सेल), केलवाड़ा थाना एसएचओ विशाल गवारिया, दिवेर एसएचओ भवानी शंकर सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा। कुंभलगढ़ एसडीएम आकांक्षा दुबे भी मौके पर मौजूद थीं।
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हिंदू संगठन विरोध करते हुए।
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महाराणा प्रताप का हुआ था जन्म
विश्व धरोहर कुंभलगढ़ दुर्ग अरावली पर्वतमाला की ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन कुंभलगढ़ दुर्ग को यूनेस्को की लिस्ट में भी शामिल किया गया है। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जन्म भी इसी फोर्ट में हुआ था। वहीं, चीन के बाद एशिया की सबसे बड़ी दीवार इसी दुर्ग की है। दुर्ग परिसर के अंदर कई देवी देवताओं के मंदिर भी हैं। कुंभलगढ़ दुर्ग के अंदर बादल महल है जो बारिश के सीजन में बादलों के बीच छिप जाता है। दुर्ग को देखने के लिए देश और दुनिया के पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
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