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Cheetah in India: राजस्थान का चीतावालान मोहल्ला, जहां 100 साल पहले डॉगी की तरह पाले जाते थे चीते

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 20 Sep 2022 06:35 PM IST
राजघराने के लिए लाए गए थे चीते।
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Cheetah in India: देश में 70 साल बाद एक बार फिर चीते आ गए हैं। पीएम मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर मप्र के कूनो नेशनल पार्क में तीन चीतों को छोड़ा। नामीबिया से आठ चीते लाए गए हैं। अभी सभी को क्वारंटीन बाड़े में रखा गया है। यह सब आपको पहले से पता होगा, लेकिन क्या आपने चीतावालान मोहल्ले का नाम सुना है, अगर नहीं, तो आइए अब इसका करीब 100 साल पुराना इतिहास जानते हैं...। 
100 साल पहले बसाया गया था मोहल्ला।
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक चीतावालान मोहल्ला है। यह शहर के रामगंज बाजार के पास स्थित है। करीब 100 साल पहले यहां चातों को पालतू कुत्ते की तरह रखा जाता है। जैसे आज-कल लोग कुत्ते के गले में जंजीर बांधकर सड़क पर घुमाते हैं, उस समय यहां यह आम बात थी। इसलिए इस मौहल्ले का नाम चीतावालान पड़ गया था। आज भी इसे इसी नाम से जाना जाता है।
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पीएम मोदी ने कूनो नेशनल पार्क में छोड़े थे चीते।
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चीतावालान मोहल्ला में रहने वाले ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों के हैं। उनके परदादाओं को राजघराने ने यहां बसाया था। सभी शिकारी परिवार से थे। वह राजघराने के लिए चीते पालते थे और उनके साथ शिकार पर जाते थे। समय के साथ चीते और उन्हें पालने वाले इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन मोहल्ले का नाम चीतावालान पड़ गया। आज भी यहां रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, वोटर कार्ड और आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों पर भी यही नाम लिखा हुआ है।  
पीएम मोदी ने चीतों की तस्वीरें भी ली थीं।
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भाजपा सांसद और राजकुमारी दिया कुमारी ने कहा कि जयपुर में स्थित चीतावालान मोहल्ला कई साल पुराना है। राजघराने के लिए यहां अफीका और ईरान से चीतों को लाया गया था। उनकी देखभाल के लिए वहां के शिकारी परिवारों को भी यहां बसाया गया था। वह चीतों को प्रशिक्षित करते थे और राजघराने के साथ शिकार पर जाते थे। राजपरिवार में उस समय के शिकारियों और चीतों की कुछ तस्वीरें हैं। 

एक बार फिर चीतों के देश में आने को लेकर दिया कुमारी ने कहा, सालों पहले जैव-विविधता की सदियों पुरानी जो कड़ी टूट गई थी, विलुप्त हो गई थी। हमें उसे फिर से जोड़ने का मौका मिला है। भारत की धरती पर चीते लौट आए हैं। इन चीतों के साथ ही भारत की प्रकृतिप्रेमी चेतना भी पूरी शक्ति से जागृत हो उठी है।
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