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यूं ही कोई मोहनदास से महात्मा गांधी नहीं बन जाता, देखिए राष्ट्रपिता बनने की यात्रा

Sat, 30 Sep 2017 02:18 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Sat, 30 Sep 2017 02:18 PM IST
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birth anniversary of mahatma gandhi 2nd october

आज हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का 148वां जन्मदिन मना रहे हैं। देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलवाने में मोहनदास करमचंद गांधी का अहम योगदान रहा है।


(तस्वीरें: एमकेगांधी.कॉम)

146वीं जयंती पर देखिए, मोहनदास के गांधी बनने की यात्रा

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अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे गांधी बैरिस्टर की पढ़ाई करने के लिए इंग्लैंड चले गए। जहां से वह 24 साल की उम्र में दक्षिण अफ्रीका चले गए और करीब 21 साल तक वहीं रहे। वहीं से गांधी ने अपने पहले आंदोलन की शुरुआत की और बाद में भारत आ गए।

146वीं जयंती पर देखिए, मोहनदास के गांधी बनने की यात्रा

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महात्मा गांधी दांडी मार्च के दौरान समर्थकों के साथ। ब्रिटिश सरकार की नमक पर करनीति के विरोध में 12 मार्च 1930 में इस पदयात्रा की शुरुआत हुई थी।

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146वीं जयंती पर देखिए, मोहनदास के गांधी बनने की यात्रा

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महात्मा गांधी और गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर एक साथ बैठे हुए।

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146वीं जयंती पर देखिए, मोहनदास के गांधी बनने की यात्रा

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महात्मा गांधी देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलवाने के लिए जो लड़ाई लड़ रहे थे, उनमें उनकी पत्नी कस्तुरबा गांधी ने हर कदम उनका साथ दिया। एक पैदल यात्रा के बाद महात्मा गांधी के पैरों को साफ करती हुई।

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