चंदन की लकड़ी और हाथी के दांतों की तस्करी लिए खुख्यात वीरप्पन की मौत आज की के दिन 18 अक्टूबर 2004 को हुई थी। दक्षिण भारत के जंगलों में वीरप्पन के आतंक और दहशत ने पुलिस और आर्मी की नाक में दम कर दिया था। खूखांर होने के साथ-साथ वीरप्पन एक तेज दिमाग का शख्स था और उसे पकड़ने के लिए सेना और पुलिस को तीन साल से भी ज्यादा का समय लगा था।
ऐसा माना जाता है वीरप्पन की काली कमाई की चाह ने तस्करी की दुनिया में नया मोड़ ला दिया था और लोगों में कहीं-न-कहीं पुलिस का डर खत्म होने लगा था। आईए बताते हैं वीरप्पन से जुड़ी वो बातें जिनके लिए वीरप्पन के आतंक से थर्रारते थे लोग।
वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952 को हुआ था और वह महज 8 साल की उम्र से ही अवैध रूप से शिकार करने वाले गिरोह में शामिल हो गया था। वीरप्पन ने इसी गिरोह में गोली चलाने से लेकर आर्मी को चकमा देना सीखा था। छोटी उम्र में ही वह सेना के जवानों के ऊपर हमला करने लगा और कई को मौत के घाट उतार दिया।
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- फोटो : Indian Express
बताया जाता है कि वीरप्पन को हाथियों का शिकार करके उनके दांतों की तस्करी करने की चाहत बचपन से ही थी। इसलिए उसने महज 12 साल की उम्र में गोली चलाकर हाथी को मार गिराया था, जबकि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार मर्डर किया। पुलिस और सेना के शिंकजे में न आने वीरप्पन ने अपने आतंक को कायम रखने के लिए लोगों की हत्या की जिसमें अधिकतर सेना के जवान शामिल थे।
वीरप्पन ने करीब 2,000 से ज्यादा हाथियों की हत्या की थी। इसके बाद उसने अपने प्रतिद्वंदी गिरोह का खात्मा किया और जंगल में अपनी बादशाहत कायम कर ली। बताया जाता है कि 40 साल में वीरप्पन ने हाथियों के दांत की तस्करी से 88 हजार पाउंड्स यानी करीब 75 करोड़ रुपये की काली कमाई की थी। इतना ही नहीं उसने करीब 10 हजार टन चंदन की लकड़ी का व्यापार किया था।
वीरप्पन की भूख तस्करी से खत्म नहीं हुई और उसने बड़ी-बड़ी हस्तियों को अगवा कर फिरौती का गोरखधंधा शुरू कर दिया। बताया जाता है कि उसने साउथ के सुपर स्टार रजनीकांत को अगवा करने का प्लान भी बनाया था। चंदन और हाथी के दांतों की तस्करी करने वाले वीरप्पन की पुलिस और सरकार से विवाद की वजह उसके भाई और बहन की मौत थी। इसी वजह से चिढ़े वीरप्पन ने 184 अफसरों की हत्या की।