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आसान नहीं रामपाल का 'अनुयायी' बनना, 3 स्तर पर लेनी पड़ती दीक्षा

Wed, 30 Aug 2017 09:07 AM IST
amarujala.com, Presented by: देव कश्यप
amarujala.com, Presented by: देव कश्यप Updated Wed, 30 Aug 2017 09:07 AM IST
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to become a followers of Rampal take three levels of initiation

सतलोक आश्रम के कथित संत रामपाल का अनुयायी बनना किसी के लिए भी आसान नहीं था। इसके लिए आश्रम में तीन स्तर पर दीक्षा दी जाती थी। 



पहले स्तर पर सदस्यता, दूसरे पर सतनाम और तीसरे स्तर पर सारनाम दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के लिए हर व्यक्ति को लंबा समय आश्रम में गुजारना होता था। दीक्षा की प्रक्रिया क्रमश: यह थी।

सदस्यता- आश्रम का सदस्य बनने के बाद से ही गुरुमंत्र दिया जाता था। यह गुरुमंत्र था गायत्री मंत्र का जाप। तीन माह तक अनुयायी इसका जाप करता रहता था। इसके लिए सदस्यों को एक हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता था, जो सदस्यता शुल्क के रूप में लिया जाता था।

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सतनाम: सदस्यता के तीन माह बाद अनुयायी को सतनाम दिया जाता था। इससे आश्रम में सदस्य की महत्ता बढ़ जाती थी। वह आश्रम के कार्यों में हाथ बंटाने लगता था। इसके लिए सदस्य को नौ हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता था। यह अनुयायी की इच्छा पर निर्भर करता था कि वह सतनाम चाहता है कि नहीं।

सारनाम: जो व्यक्ति दस वर्षों तक आश्रम से जुड़ा रहता था,उसे सारनाम दिया जाता था। ऐसे सदस्य कार्यकारिणी में भी शामिल किए जाते थे और इन्हें कोई न कोई पद भी मिलता था। इसके लिए दस हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता था। यह सतनाम प्राप्त सदस्यों की इच्छा पर था कि वह इसे ग्रहण करना चाहते हैं अथवा नहीं।

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सतलोक का टिकट- दीक्षा की प्रक्रिया पार करने वाले और 15 वर्षों तक आश्रम में निष्ठा से सेवा करने वालों के लिए सतलोक का टिकट दिया जाता था। इसकी कीमत एक लाख रुपये थी। हालांकि यह टिकट आश्रम के ज्यादातर धनाढ्य सदस्य ही ले पाते थे। आश्रम की ओर से यह दावा किया जाता था कि सतलोक  का टिकट पाने वाला सीधे स्वर्ग जाता है।

रामपाल ने अपने खास सेवकों को एक विशेष कोड दिया हुआ था। कोड के हिसाब से अलग-अलग सेवादारों के काम का बंटवारा और आश्रम के एक सीमित दायरे तक एंट्री कार्ड था। सतलोक आश्रम में खास राजदारों को चार कोड नंबर दिए हुए थे।

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इस कोड में ए, बी, सी, डी कोड लिखा होता था। हर कोड के सीमित सेवादारों को इनका टोकन दिया हुआ था। रामपाल की निजता भंग न हो, इसके लिए कोड टोकन देखने के बाद ही सेवादार की एंट्री होती थी।

ए कोड केवल महिलाओं को

रामपाल के एक अनुयायी ने बताया है कि ए कोड केवल चार से पांच महिलाओं के पास था। ये महिलाएं कोठी में रामपाल के साथ ही रहती थीं। रामपाल के खान-पान का ध्यान रखना, लॉकरों में रखे जाने वाले धन के बारे में इन्हें भी जानकारी होती थी। कोठी में रहने वाली महिला सेवादार कभी बाहर नहीं निकलती थीं। इन्हें बाहर के लोगों से सीधे रूप में बातचीत करने का अधिकार नहीं था।

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रामपाल के बाथरूम के सामने कुछ खास सेवादारों की सूची मिली है। इन सेवादारों को आश्रम ने कोड बी दे रखा था। बताया जा रहा है कि ये बी कोड वाले महिला-पुरुष सेवादार रामपाल की मसाज करते थे।

इन सेवादारों को अलग-अलग दिन के हिसाब से बुलाया जाता था। कड़े पहरे में ही ये रामपाल के ‘राजमहल’ में घुसते थे। इन्हें चेकिंग के बाद अंदर आने दिया जाता और फिर बाहर तक सेवादार खुद छोड़कर आते थे।

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