फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Sawan 2023: इकलौता शिवलिंग जिसका सरसों के तेल से होता है अभिषेक, इस मंदिर से है हनुमान जी का खास नाता

Fri, 28 Jul 2023 02:56 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 28 Jul 2023 02:56 PM IST
सार

Sawan 2023: इकलौता शिवलिंग जिसका सरसों के तेल से होता है अभिषेक, इस मंदिर से है हनुमान जी का खास नाता

विज्ञापन
Sawan 2023: Shivling is anointed with mustard oil in Hanumtakeshwar Shiva temple see photos
हनुमत्केश्वर शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
गढ़कालिका से कालभैरव मार्ग पर जाने वाले ओखलेश्वर घाट पर श्री हनुमत्केश्वर महादेव का अति प्राचीन मंदिर विद्यमान है, जो कि 84 महादेव में 79वें स्थान पर आता है। मंदिर के पुजारी पंडित केदार मोड़ के अनुसार यह विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है। जहां सरसों का तेल भगवान को अर्पित कर उनका अभिषेक पूजन किया जाता है, और उन्हें तिल के बने पकवानों का ही भोग लगाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जो कि 24 घंटे चालू रहता है। मंदिर में कहीं भी ताला नहीं लगाया जाता है। वैसे तो श्री हनुमत्केश्वर महादेव की महिमा अत्यंत निराली है, जिनके दर्शन करने मात्र से ही चेतन्यता प्राप्त हो जाती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष पूजन अर्चन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 


Sawan 2023: Shivling is anointed with mustard oil in Hanumtakeshwar Shiva temple see photos
मंदिर में स्थित हैं कई प्रतिमाएं - फोटो : अमर उजाला
पुजारी पंडित केदार मोड़ ने बताया कि मंदिर में भगवान शिव की अत्यंत चमत्कारी प्रतिमा के साथ ही पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा भी है। इन प्रतिमाओं के साथ ही मंदिर में भगवान श्री गणेश, कार्तिक जी और माता पार्वती के साथ ही नंदी जी भी विराजमान हैं। मंदिर में वैसे तो वर्षभर ही अनेकों उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन हनुमान अष्टमी, हनुमान जयंती, शिव नवरात्रि के नौ दिन और श्रावण मास में भगवान का महारुद्राभिषेक विशेष रूप से किया जाता है। 
Sawan 2023: Shivling is anointed with mustard oil in Hanumtakeshwar Shiva temple see photos
श्री हनुमत्केश्वर की पौराणिक कथा
इस मंदिर की कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन बताया जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भगवान श्रीराम से मिलने के लिए जब हनुमान जी उपहार स्वरूप एक शिवलिंग साथ ले जा रहे थे, तभी उन्होंने कुछ समय महाकाल वन में रुककर शिवलिंग की पूजा की थी। इस पूजन अर्चन के बाद भगवान सदैव यहीं विराजमान हो गए थे, क्योंकि इन्हें हनुमान जी साथ लेकर आए थे इसीलिए इस मंदिर का नाम श्री हनुमत्केश्वर महादेव पड़ गया। मंदिर में पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा आज भी विराजमान हैं। इस मंदिर की कथा में यह भी बताया जाता है कि हनुमान जी के बाल्यावस्था में जब वे भगवान सूर्य को गेंद समझकर पकड़ने के लिए गए थे। उसी समय भगवान इंद्र ने उन पर वज्राघात कर दिया था, हनुमान जी को महाकाल वन में विराजमान शिवलिंग का पूजन अर्चन करने से ही चेतन्यता प्राप्त हुई थी और पवन देव ने तभी से इस लिंग का नाम श्री हनुमत्केश्वर महादेव रखा और यही कारण है कि इसी नाम से यह विख्यात भी हुआ।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed