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Christmas 2022: मध्यप्रदेश में है एशिया का दूसरा सबसे खूबसूरत चर्च, 155 साल पहले अंग्रेजों ने कराया था निर्माण
Sun, 25 Dec 2022 07:59 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 25 Dec 2022 07:59 AM IST
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ऑल सेंट चर्च, सीहोर
- फोटो : अमर उजाला
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सीहोर में करीब डेढ़ सौ साल पहले अंग्रेजों ने पॉलिटिकल एजेंट के माध्यम से अपनी सत्ता स्थापित की थी। आजादी के बाद भी अंग्रेजों की ऐतिहासिक विरासत प्राचीन भवनों में दिखाई देती है। आस्था के प्रतीक चर्च आज भी ब्रिटिश दौर की यादों और शैली को प्रदर्शित करते हैं। सीहोर शहर का ऑल सेंट चर्च अपनी स्थापना का 155वां साल पूरा कर रहा है, जो न केवल ईसाई समुदाय की आस्था का प्रतीक है बल्कि ऐतिहासिक इमारत के रूप में ख्याति प्राप्त भी है। शहर के दक्षिण पूर्व में स्थित बड़ा सा इलाका चर्च खेल मैदान, बांसों के झुरमुट के साथ ऑल सेंट चर्च के रूप में ख्याति अर्जित किए है। ऑल सेंट चर्च का निर्माण अंग्रेज पॉलिटिकल एजेंट जेडब्ल्यू ओसविन ने 1867 में पूरा कराया था।
27 साल में बनकर तैयार हुआ था ऑल सेंट चर्च
- फोटो : अमर उजाला
27 साल में बनकर तैयार हुआ था चर्च
ऑल सेंट चर्च में शिल्प और आस्था का अदभुत संगम दिखाई देता है जानकारों के अनुसार 1834 में अंग्रेजी हुकूमत के पहले पॉलिटिकल एजेन्ट जेडब्ल्यू ओसबार्न ने अपने भाई की याद में सीवन नदी के किनारे यह चर्च बनवाना शुरू किया था। यह चर्च 27 साल में बनकर तैयार हुआ यहां पहली बार जीसस के सामने प्रार्थना की गई। तभी से यहां लगातार क्रिश्चन परिवार प्रार्थना को आते रहे हैं। चर्च तक जाने के लिए सीवन नदी पर लकड़ियों का पुल बनाया गया, जिस पर से निकलकर अंग्रेज चर्च जाते थे। यह चर्च स्कॉटलैंड में बने चर्च को देख कर बनवाया गया था। इस तरह का चर्च अब भी स्कॉटलैंड में होना बताया जाता है। इस चर्च के आसपास बांसों के झुरमुट लगाए गए, जिससे की उसी तरह का वातावरण मिल सकें, जिस तरह का स्कॉटलैंड में पॉलिटिकल एजेंट ओसबार्न ने देखा था।
ऑल सेंट चर्च में शिल्प और आस्था का अदभुत संगम दिखाई देता है जानकारों के अनुसार 1834 में अंग्रेजी हुकूमत के पहले पॉलिटिकल एजेन्ट जेडब्ल्यू ओसबार्न ने अपने भाई की याद में सीवन नदी के किनारे यह चर्च बनवाना शुरू किया था। यह चर्च 27 साल में बनकर तैयार हुआ यहां पहली बार जीसस के सामने प्रार्थना की गई। तभी से यहां लगातार क्रिश्चन परिवार प्रार्थना को आते रहे हैं। चर्च तक जाने के लिए सीवन नदी पर लकड़ियों का पुल बनाया गया, जिस पर से निकलकर अंग्रेज चर्च जाते थे। यह चर्च स्कॉटलैंड में बने चर्च को देख कर बनवाया गया था। इस तरह का चर्च अब भी स्कॉटलैंड में होना बताया जाता है। इस चर्च के आसपास बांसों के झुरमुट लगाए गए, जिससे की उसी तरह का वातावरण मिल सकें, जिस तरह का स्कॉटलैंड में पॉलिटिकल एजेंट ओसबार्न ने देखा था।
स्कॉटलैंड में बने चर्च की कॉपी है
- फोटो : सोशल मीडिया
स्कॉटलैंड के चर्च की तर्ज पर बना है
ओसबार्न चाहते थे कि उन्हें यहां रहते हुए स्कॉटलैंड के वातावरण की कमी महसूस न हो इसीलिए उन्होंने हुबहू वैसा ही चर्च और उसी तरह का वातावरण निर्मित किया और वह सफल भी हुए। चर्च की दीवारें लाल पत्थर से बनाई गई, नक्काशी भी उसी तरह की गई जिस तरह की स्कॉटलैंड के चर्च में की गई हैं। चर्च में वास्तुशास्त्र का भी ध्यान रखा गया है। सूरज के उदय होने से लेकर डूबने तक चर्च के कौन सी जगह पर रोशनी आएगी इसका भी ध्यान ओसबार्न ने रखा। इस चर्च का जिक्र भारत के गेजेटियर 1908 में भी जिक्र किया गया है।
ओसबार्न चाहते थे कि उन्हें यहां रहते हुए स्कॉटलैंड के वातावरण की कमी महसूस न हो इसीलिए उन्होंने हुबहू वैसा ही चर्च और उसी तरह का वातावरण निर्मित किया और वह सफल भी हुए। चर्च की दीवारें लाल पत्थर से बनाई गई, नक्काशी भी उसी तरह की गई जिस तरह की स्कॉटलैंड के चर्च में की गई हैं। चर्च में वास्तुशास्त्र का भी ध्यान रखा गया है। सूरज के उदय होने से लेकर डूबने तक चर्च के कौन सी जगह पर रोशनी आएगी इसका भी ध्यान ओसबार्न ने रखा। इस चर्च का जिक्र भारत के गेजेटियर 1908 में भी जिक्र किया गया है।
