सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर ओंकारेश्वर में प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर स्थानीय नागरिकों का विरोध तेज हो गया है। मकान, दुकान और रोजगार प्रभावित होने की आशंका के बीच स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों, संपत्ति मालिकों और जनप्रतिनिधियों ने 19 अक्तूबर से ओंकारेश्वर नगर बंद का आह्वान किया है। उनका कहना है कि प्रशासन के समक्ष 16 सदस्यीय समिति के माध्यम से रखी गई 19 सूत्रीय मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है।
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19 अक्तूबर से ओंकारेश्वर बंद का एलान, 19 सूत्रीय मांगों पर नहीं बनी सहमति; संत मंडल ने दी आंदोलन की चेतावनी
Fri, 16 Oct 2026 11:01 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:01 PM IST
सार
सिंहस्थ 2028 के विकास कार्यों से प्रभावित होने की आशंका के बीच ओंकारेश्वर के स्थानीय नागरिकों ने 19 अक्तूबर से नगर बंद का ऐलान किया है। 19 सूत्रीय मांगों पर सहमति नहीं बनने से नाराज लोगों ने उचित मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार सुरक्षा की मांग की है।
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ओंकारेश्वर में नागरिकों की अहम बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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ओंकारेश्वर षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष मंगलदास त्यागी जी महाराज
- फोटो : अमर उजाला
19 सूत्रीय मांगों पर सहमति नहीं, आंदोलन का ऐलान
स्थानीय नागरिकों ने प्रभावित संपत्तियों का निष्पक्ष सीमांकन, बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा, स्वतंत्र मूल्यांकन, वैकल्पिक आवास और दुकानें, किरायेदार दुकानदारों के रोजगार की सुरक्षा तथा विस्थापन से पहले लिखित पुनर्वास योजना लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को केवल जमीन और भवन के मूल्य तक सीमित मुआवजा नहीं मिलना चाहिए। दुकान या व्यवसाय हटने से होने वाले आजीविका के नुकसान को भी मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के लिए ओंकारेश्वर का विकास जरूरी है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में वर्षों से यहां रह रहे परिवारों और कारोबारियों के भविष्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर मुआवजे की मांग
बैठक में वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए प्रभावित संपत्तियों के लिए उचित और पर्याप्त मुआवजे की मांग उठाई गई। नागरिकों ने कहा कि मकान, दुकान और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन स्वतंत्र एवं अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से कराया जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन आरआई, पटवारी और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम से मौके पर कराने तथा इस प्रक्रिया में संपत्ति मालिकों को उपस्थित रहने का अवसर देने की मांग की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी संपत्ति को प्रभावित घोषित करने से पहले उसके स्वामित्व, वास्तविक स्थिति, उपयोग और वहां चल रही आजीविका का निष्पक्ष आकलन होना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने प्रभावित संपत्तियों का निष्पक्ष सीमांकन, बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा, स्वतंत्र मूल्यांकन, वैकल्पिक आवास और दुकानें, किरायेदार दुकानदारों के रोजगार की सुरक्षा तथा विस्थापन से पहले लिखित पुनर्वास योजना लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को केवल जमीन और भवन के मूल्य तक सीमित मुआवजा नहीं मिलना चाहिए। दुकान या व्यवसाय हटने से होने वाले आजीविका के नुकसान को भी मुआवजे और पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ के लिए ओंकारेश्वर का विकास जरूरी है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में वर्षों से यहां रह रहे परिवारों और कारोबारियों के भविष्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर मुआवजे की मांग
बैठक में वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए प्रभावित संपत्तियों के लिए उचित और पर्याप्त मुआवजे की मांग उठाई गई। नागरिकों ने कहा कि मकान, दुकान और अन्य परिसंपत्तियों का मूल्यांकन स्वतंत्र एवं अधिकृत मूल्यांकनकर्ता से कराया जाए। साथ ही प्रभावित क्षेत्र का सीमांकन आरआई, पटवारी और संबंधित अधिकारियों की संयुक्त टीम से मौके पर कराने तथा इस प्रक्रिया में संपत्ति मालिकों को उपस्थित रहने का अवसर देने की मांग की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी संपत्ति को प्रभावित घोषित करने से पहले उसके स्वामित्व, वास्तविक स्थिति, उपयोग और वहां चल रही आजीविका का निष्पक्ष आकलन होना चाहिए।
संतोष वर्मा नगर अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी ओंकारेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
रजिस्ट्री और पट्टे वाले मकानों के लिए भी पुनर्वास की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की कि पुनर्वास का लाभ केवल रजिस्टर्ड संपत्तियों तक सीमित न रहे। शासकीय पट्टे पर बने मकानों और लंबे समय से आवास या व्यवसाय के लिए उपयोग की जा रही संपत्तियों के मामलों में भी लागू नियमों और पुनर्वास नीति के अनुसार पात्रता तय की जाए। सबसे प्रमुख मांग यह है कि किसी परिवार को बेघर करने या दुकानदार का व्यवसाय हटाने से पहले वैकल्पिक आवास अथवा दुकान की व्यवस्था की जाए। नागरिकों ने प्रभावित लोगों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय देने और बिना उचित समय दिए मकान-दुकान खाली कराने की कार्रवाई नहीं करने की मांग भी रखी।
टंट्या मामा प्रतिमा से गणेश नगर तक भूखंड देने का प्रस्ताव
बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ओंकारेश्वर वेलकम गेट के पास टंट्या मामा प्रतिमा से गणेश नगर तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर उपलब्ध उपयुक्त भूमि पर 60×90 फीट के भूखंड भूमि स्वामित्व अधिकार सहित देने की मांग रखी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके सामाजिक संबंध, रोजगार और तीर्थयात्रियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां इसी क्षेत्र में केंद्रित हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों को दूर विस्थापित करने के बजाय ओंकारेश्वर के मुख्य क्षेत्र में ही वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन प्रभावित न हो।
दुकानदारों और किरायेदारों के रोजगार की सुरक्षा पर जोर
बैठक में कहा गया कि दुकान हटने का असर केवल भवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की आय और आजीविका प्रभावित होती है। इसलिए प्रभावित दुकानदारों को पुराने व्यवसाय स्थल के आसपास या मुख्य क्षेत्र में वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराई जाएं। स्थायी दुकानें तैयार होने तक अस्थायी दुकानों की व्यवस्था भी की जाए। निजी भूमि पर वर्षों से कारोबार कर रहे किरायेदार दुकानदारों के पुनर्वास की मांग भी उठाई गई। नागरिकों ने वैकल्पिक दुकान या भूखंड आवंटन में उन्हें प्राथमिकता देने और भूमि मालिकों की ओर से किराया बढ़ाने, अतिरिक्त पगड़ी या प्रीमियम जैसी शर्तों के कारण उन पर अनुचित आर्थिक बोझ नहीं पड़ने देने की मांग की।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की कि पुनर्वास का लाभ केवल रजिस्टर्ड संपत्तियों तक सीमित न रहे। शासकीय पट्टे पर बने मकानों और लंबे समय से आवास या व्यवसाय के लिए उपयोग की जा रही संपत्तियों के मामलों में भी लागू नियमों और पुनर्वास नीति के अनुसार पात्रता तय की जाए। सबसे प्रमुख मांग यह है कि किसी परिवार को बेघर करने या दुकानदार का व्यवसाय हटाने से पहले वैकल्पिक आवास अथवा दुकान की व्यवस्था की जाए। नागरिकों ने प्रभावित लोगों को दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय देने और बिना उचित समय दिए मकान-दुकान खाली कराने की कार्रवाई नहीं करने की मांग भी रखी।
टंट्या मामा प्रतिमा से गणेश नगर तक भूखंड देने का प्रस्ताव
बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ओंकारेश्वर वेलकम गेट के पास टंट्या मामा प्रतिमा से गणेश नगर तक मुख्य मार्ग के दोनों ओर उपलब्ध उपयुक्त भूमि पर 60×90 फीट के भूखंड भूमि स्वामित्व अधिकार सहित देने की मांग रखी गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके सामाजिक संबंध, रोजगार और तीर्थयात्रियों से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां इसी क्षेत्र में केंद्रित हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों को दूर विस्थापित करने के बजाय ओंकारेश्वर के मुख्य क्षेत्र में ही वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक जीवन प्रभावित न हो।
दुकानदारों और किरायेदारों के रोजगार की सुरक्षा पर जोर
बैठक में कहा गया कि दुकान हटने का असर केवल भवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की आय और आजीविका प्रभावित होती है। इसलिए प्रभावित दुकानदारों को पुराने व्यवसाय स्थल के आसपास या मुख्य क्षेत्र में वैकल्पिक दुकानें उपलब्ध कराई जाएं। स्थायी दुकानें तैयार होने तक अस्थायी दुकानों की व्यवस्था भी की जाए। निजी भूमि पर वर्षों से कारोबार कर रहे किरायेदार दुकानदारों के पुनर्वास की मांग भी उठाई गई। नागरिकों ने वैकल्पिक दुकान या भूखंड आवंटन में उन्हें प्राथमिकता देने और भूमि मालिकों की ओर से किराया बढ़ाने, अतिरिक्त पगड़ी या प्रीमियम जैसी शर्तों के कारण उन पर अनुचित आर्थिक बोझ नहीं पड़ने देने की मांग की।
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राजेश यादव पार्षद नगर परिषद ओंकारेश्वर प्रतिपक्ष नेता
- फोटो : अमर उजाला
मुआवजे में आजीविका के नुकसान का आकलन हो
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मकान या दुकान हटने पर केवल जमीन और भवन का मूल्य ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि वर्षों में बनाया गया व्यवसाय, ग्राहक और आय का साधन भी खत्म हो सकता है। इसलिए मुआवजा तय करते समय भूमि और भवन के साथ कारोबार एवं आजीविका के नुकसान का भी आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित परिवार और दुकानदार की अलग सूची तैयार करने तथा मुआवजे, वैकल्पिक भूखंड, आवास, दुकान और पुनर्वास की स्थिति का लिखित विवरण जारी करने की मांग की। प्रभावित लोगों को अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने और नई व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय देने पर भी जोर दिया गया।
2016 के विकास कार्यों का दिया हवाला
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील शर्मा ने कहा कि वर्ष 2016 में भी ओंकारेश्वर में विकास कार्यों के दौरान मकान और दुकान प्रभावित हुए थे। उस समय स्थानीय लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया था। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में सहयोग के बावजूद यदि अब लोगों को पूरी तरह हटाने की स्थिति बनती है, तो यह उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि स्थानीय नागरिक विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके आवास और रोजगार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जरूरत के अनुसार जमीन देने में सहयोग करेंगे: सांसद प्रतिनिधि
सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि नगर के लोग एकजुट हैं। यदि सड़क या अन्य विकास कार्यों के लिए किसी स्थान की आवश्यकता है, तो स्थानीय नागरिक सहयोग करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरे ओंकारेश्वर को हटाने जैसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के हितों का संरक्षण करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रकाश परिहार ने कहा कि 16 सदस्यीय समिति ने शासन-प्रशासन के समक्ष जो मांगें रखी हैं, उनका समाधान नहीं होने पर नगर परिषद स्थानीय नागरिकों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि नगर के लोगों के हितों और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मकान या दुकान हटने पर केवल जमीन और भवन का मूल्य ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि वर्षों में बनाया गया व्यवसाय, ग्राहक और आय का साधन भी खत्म हो सकता है। इसलिए मुआवजा तय करते समय भूमि और भवन के साथ कारोबार एवं आजीविका के नुकसान का भी आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित परिवार और दुकानदार की अलग सूची तैयार करने तथा मुआवजे, वैकल्पिक भूखंड, आवास, दुकान और पुनर्वास की स्थिति का लिखित विवरण जारी करने की मांग की। प्रभावित लोगों को अपना सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने और नई व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय देने पर भी जोर दिया गया।
2016 के विकास कार्यों का दिया हवाला
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील शर्मा ने कहा कि वर्ष 2016 में भी ओंकारेश्वर में विकास कार्यों के दौरान मकान और दुकान प्रभावित हुए थे। उस समय स्थानीय लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया था। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में सहयोग के बावजूद यदि अब लोगों को पूरी तरह हटाने की स्थिति बनती है, तो यह उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि स्थानीय नागरिक विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनके आवास और रोजगार की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
जरूरत के अनुसार जमीन देने में सहयोग करेंगे: सांसद प्रतिनिधि
सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि नगर के लोग एकजुट हैं। यदि सड़क या अन्य विकास कार्यों के लिए किसी स्थान की आवश्यकता है, तो स्थानीय नागरिक सहयोग करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरे ओंकारेश्वर को हटाने जैसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने विकास कार्यों के साथ स्थानीय लोगों के हितों का संरक्षण करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रकाश परिहार ने कहा कि 16 सदस्यीय समिति ने शासन-प्रशासन के समक्ष जो मांगें रखी हैं, उनका समाधान नहीं होने पर नगर परिषद स्थानीय नागरिकों के साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि नगर के लोगों के हितों और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।
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चंपा बाई नगर परिषद पार्षद
- फोटो : अमर उजाला
संत मंडल ने दी भूख हड़ताल और जल सत्याग्रह की चेतावनी
षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष मंगलदास त्यागी ने कहा कि स्थानीय नागरिकों के साथ बैठक में 19 अक्तूबर से ओंकारेश्वर नगर बंद करने का सामूहिक निर्णय लिया गया है। यदि इसके बाद भी शासन-प्रशासन मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने भूख हड़ताल, आमरण अनशन और जल सत्याग्रह जैसे आंदोलन करने की चेतावनी दी। त्यागी ने कहा कि ओंकारेश्वर के संत पहले भी नगरवासियों के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी उनका साथ देंगे। जरूरत पड़ने पर देशभर से संतों को ओंकारेश्वर बुलाया जाएगा।
विकास के साथ स्थानीय हितों की सुरक्षा की मांग
ओंकारेश्वर में विवाद का मुख्य मुद्दा विकास कार्यों का विरोध नहीं, बल्कि विस्थापन से प्रभावित होने वाले परिवारों, दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों के आवास एवं रोजगार की सुरक्षा है। नागरिक चाहते हैं कि सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क, यातायात, पार्किंग, घाट और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विकास हो, लेकिन इसके साथ स्थानीय लोगों के भविष्य का भी ध्यान रखा जाए। बैठक में मांग की गई कि पहले प्रभावित क्षेत्र का सर्वे और सीमांकन किया जाए, प्रभावितों की सूची तैयार हो तथा मुआवजे और पुनर्वास की लिखित योजना सार्वजनिक की जाए। इसके बाद ही विस्थापन की कार्रवाई की जाए। 19 अक्टूबर से नगर बंद के ऐलान के बाद अब प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के अगले कदम पर नजर है। मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में संत मंडल और स्थानीय नागरिक आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दे चुके हैं।
षट् दर्शन संत मंडल के अध्यक्ष मंगलदास त्यागी ने कहा कि स्थानीय नागरिकों के साथ बैठक में 19 अक्तूबर से ओंकारेश्वर नगर बंद करने का सामूहिक निर्णय लिया गया है। यदि इसके बाद भी शासन-प्रशासन मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने भूख हड़ताल, आमरण अनशन और जल सत्याग्रह जैसे आंदोलन करने की चेतावनी दी। त्यागी ने कहा कि ओंकारेश्वर के संत पहले भी नगरवासियों के साथ खड़े रहे हैं और आगे भी उनका साथ देंगे। जरूरत पड़ने पर देशभर से संतों को ओंकारेश्वर बुलाया जाएगा।
विकास के साथ स्थानीय हितों की सुरक्षा की मांग
ओंकारेश्वर में विवाद का मुख्य मुद्दा विकास कार्यों का विरोध नहीं, बल्कि विस्थापन से प्रभावित होने वाले परिवारों, दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों के आवास एवं रोजगार की सुरक्षा है। नागरिक चाहते हैं कि सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क, यातायात, पार्किंग, घाट और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विकास हो, लेकिन इसके साथ स्थानीय लोगों के भविष्य का भी ध्यान रखा जाए। बैठक में मांग की गई कि पहले प्रभावित क्षेत्र का सर्वे और सीमांकन किया जाए, प्रभावितों की सूची तैयार हो तथा मुआवजे और पुनर्वास की लिखित योजना सार्वजनिक की जाए। इसके बाद ही विस्थापन की कार्रवाई की जाए। 19 अक्टूबर से नगर बंद के ऐलान के बाद अब प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के अगले कदम पर नजर है। मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में संत मंडल और स्थानीय नागरिक आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दे चुके हैं।
