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संजय गांधी के करीबी रहे कमलनाथ इस तरह बन गए गांधी परिवार के खास
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Nov 2018 05:57 PM IST
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कमलनाथ
मध्यप्रदेश में कांग्रेस को 15 साल से मिल रही हाल का सिलसिला तोड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार जिस शख्स पर दांव खेला वह हैं छिंदवाड़ा से सांसद कमलनाथ। वो शख्स जो कभी संजय गांधी का अभिन्न मित्र रहा, जो हर मुश्किल दौर में गांधी परिवार के साथ खड़ा रहा। कानपुर में जन्मा ये शख्स किस तह मध्यप्रदेश का हो गया इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है। कमलनाथ के सियासी सफरनामा पर डालते हैं एक नजर।
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कमलनाथ का सफरनामा
कमलनाथ का जन्म 18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक बिजनेसमैन परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा देहरादून के दून स्कूल में हुई और कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की। मध्यप्रदेश से कमलनाथ का गहरा राजनीतिक रिश्ता है। इंदिरा गांधी ने ही उन्हें चुनाव लड़ने के लिए छिंदवाड़ा भेजा था और फिर वह यहीं के होकर रह गए। आज छिंदवाड़ा और कमलनाथ एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं।
कमलनाथ का सफरनामा
छिंदवाड़ा से नौ बार सांसद कमलनाथ गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे हैं। 70 के दशक में संजय गांधी और कमलनाथ की दोस्ती के चर्चे आम थे। बताया जाता है कि दोनों की दोस्ती दून स्कूल से शुरू हुई थी। इसी दोस्ती ने उन्हें गांधी परिवार के बेहद करीब ला दिया था। संजय गांधी की मौत के बाद भी गांधी परिवार से उनकी करीबी बरकरार रही। मध्यप्रदेश की कमान उनके हाथों में सौंपना इस बात को साबित करता है कि उनपर से गांधी परिवार का भरोसा कायम है। इस बार वह सीएम पद के प्रबल दावेदार हैं।
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कमलनाथ का सफरनामा
- फोटो : Amar Ujala
उच्च शिक्षा के लिए कमलनाथ देहरादून से कोलकाता चले गए लेकिन संजय गांधी से दिलों की दूरी कम नहीं हुई। वह गांधी परिवार के करीब ही बने रहे। बताया जाता है कि जब कमलनाथ की कंपनी संकट में थी तब इसे उबारने में संजय गांधी ने अहम भूमिका निभाई थी। दोनों की दोस्ती उस दौर में सियासी गलियारों में खूब चर्चित थी। दोनों को हर वक्त साथ ही देखा जाता था। राजीव गांधी राजनीति में आने के इच्छुक नहीं थे, ऐसे में संजय गांधी को कमलनाथ जैसा साथी मिला जो उनके साथ कंधे से कंधा मिला रहा था। 1975 का दौर इंदिरा गांधी और कांग्रेस के लिए बेहद मुश्किल भरा था। संजय गांधी की असमय मौत ने भी इंदिरा गांधी को तोड़ दिया था। कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही थी। उसी दौर में उन्होंने कमलनाथ को छिंदवाड़ा की सीट से टिकट देकर राजनीति में उतार दिया।
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कमलनाथ का सफरनामा
- फोटो : Amar Ujala
कमलनाथ छिंदवाड़ा से शानदार जीत हासिल करते हुए 34 साल की उम्र में लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह पूरी तरह छिंदवाड़ा के हो गए। वह इस सीट से 9 बार जीते, हालांकि 1997 में सिर्फ एक बार उन्हें सुंदरलाल पटवा के हाथों हार मिली। दरअसल, 1996 में हवाला कांड में नाम आने के कारण उनकी जगह उनकी पत्नी पत्नी अलका नाथ को टिकट दिया गया और उन्होंने जीत भी हासिल की। एक साल बाद कोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद अलका ने इस्तीफा दे दिया और कमलनाथ ने उपचुनाव लड़ा। लेकिन उन्हें सुंदरलाल पटवा के हाथों हार मिली।
