मध्यप्रदेश में कटनी जिले के कैमोर में 87 साल से लगातार रावण दहन की परंपरा चली आ रही है। जो न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश में प्रसिद्ध है। इस बार यहां 102 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया है, जो पिछले बार से 11 फीट बड़ा बनाया गया है।
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रावण का पुतला
- फोटो : अमर उजाला
कटनी मुख्यालय से 37 किमी की दूरी में बसा औद्योगिकी नगरी कैमोर में इस बार 102 फीट का रावण बनाया गया है, जिसे एक ही परिवार के 35 लोग पिछले चार पीढ़ियों से बनाते आ रहे हैं। सलैया कुम्हारी ग्राम के कारीगर ने बताया कि कैमोर के दहशरा का इतिहास दशकों पुराना है, जिसे ईको-फ्रेंडली बनाने के लिए बांस, मिट्टी, रस्सी और कपड़े का प्रयोग करते हैं। ताकि पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान न हो, जिसमें कुछ लोग बांस से रावण का ढांचा बनाते हैं तो कोई कागज को गोंद से चिपकाते हुए उसे रंग-बिरंगे कपड़ों से सजाता है। ऐसे ही डेढ़ माह में रावण का पुतला बनकर तैयार हो जाता है।
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लोगों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
कैमोर दशहरे में सबसे बड़ा योगदान एसीसी कंपनी का है, जो इस परंपरा को पिछले 87 वर्ष से जारी रखे हुए है। कंपनी हेड एचपी सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश के कई जिलों से लोग कैमोर का दशहरा देखने आते हैं। इसके लिए कम्पनी देश की प्रसिद्ध रामलीला मंडली बुलाती है, जो पूरे नौ दिनों तक भगवान श्रीराम के जीवन चरितार्थ दिखाते हैं और अंतिम दिन यानी दशहरे की रात भगवान श्रीराम द्वारा इलेक्ट्रिक बाण के प्रयोग करते हुए इस बार 102 फीट रावण का दहन किया जाएगा, जो पूरे दशहरे का आकर्षण का केंद्र भी है। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि बुराई कितनी भी बड़ी क्यों न हो। लेकिन उनके अंत के लिए महज एक सच्चाई रूपी तीर ही काफी होता है।
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कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
शहडोल से आए शैलेष पांडे ने बताया कि कटनी जिले के कैमोर का रावण और दशहरा पूरे देश में प्रसिद्ध है, जिसे देखने लाखों लोग यहां आते हैं। हम भी पूरे परिवार के साथ इसका अनुभव लेने आए हैं। इतना बड़ा रावण और कंपनी की इतनी बेहतर व्यवस्था देखकर हम लोग दंग हैं, हमे बहुत अच्छा लगा। तो वहीं प्रदेश के पूर्व मंत्री और क्षेत्र के स्थानीय विधायक संजय पाठक ने इस पर्व को असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक वाला पर्व बताया है, जिनके अनुसार प्रभु श्रीराम का जीवन बताता है हमें कैसे एक पुत्र, भाई से लेकर राजा बनना चाहिए। बता दें, इस बड़े आयोजन को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न करवाने के लिए जिला प्रशासन और कम्पनी के सुरक्षा कर्मियों की टीम तीन स्तरीय घेरा बनाती है। इसके अलावा सीसीटीवी और ड्रोन कैमरे से निगरानी बनाए रखते हैं, ताकि कोई दुर्घटना न हो सके।