“सिटी ऑफ चेस” कहलाने वाले कटनी में नवरात्रि के अवसर पर कटनी डिस्ट्रिक्ट चेस एसोसिएशन ने दुर्गा पंडाल के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का अनूठा संदेश दिया। एमजीएम अस्पताल के पास विशाल शतरंज बोर्ड पर आयोजित गतिविधियों में यह बताया गया कि खेल की सबसे शक्तिशाली मोहरा ‘क्वीन’ है, जो नारी शक्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर महिला ग्रैंडमास्टर्स वैरी देशमुख और कोनेरू हम्पी को सम्मानित कर खेल व समाज में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया गया।
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कटनी में इस पंडाल ने बंटोरी सुर्खियां
- फोटो : अमर उजाला
भारत, जो अपने जीवंत त्योहारों, समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है, अब शतरंज को सामाजिक संदेशों से जोड़कर अपनी विरासत का अभिनव उत्सव मना रहा है। इसी कड़ी में कटनी डिस्ट्रिक्ट चेस एसोसिएशन (KDCA) ने इस नवरात्रि के अवसर पर एक अनोखी पहल की है। आपको बता दें कटनी, जिसे "सिटी ऑफ चेस" के रूप में जाना जाता है, छोटे शहर होते हुए भी देश को कई शीर्ष स्तर के खिलाड़ी दे चुका है। यहीं से भारत के पहले आईएम अक्षत खम्पारिया और उसके बाद इमानुज शिवर्टी जैसे खिलाड़ी निकले, जिन्होंने इस पहचान को और मजबूती दी।
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परंपरा और रणनीति के इस अद्भुत संगम ने न केवल लोगों को शतरंज से जोड़ा बल्कि यह भी दर्शाया कि खेल में महिला खिलाड़ियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। इसी अवसर पर देश की प्रतिभाशाली महिला ग्रैंडमास्टर्स वैरी देशमुख और कोनेरू हम्पी को सम्मानित कर, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। KDCA ने संदेश दिया कि जैसे मां दुर्गा की दिव्य शक्ति हमें जीवन की चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणा देती है, वैसे ही शतरंज हमें रणनीति और धैर्य से हर परिस्थिति का सामना करना सिखाता है।