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खुद के भविष्य के साथ पर्यावरण की सेहत सुधार रहे लखनऊ के ये युवा

Sat, 28 Nov 2020 05:24 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 28 Nov 2020 05:24 PM IST
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Youths are also working for the environment along with preparing for competition
पर्यावरण के लिए काम कर रहे ये युवा - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में खुद को व्यस्त रखने के लिए शहर के कई युवाओं के समूहों ने कॉम्पटीशन की तैयारी के साथ पर्यावरण के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इनका कहना है कि कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए सावधानी और सतर्कता तो सभी को बरतनी होगी, साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखना भी जरूरी है। वैसे भी आने वाले वक्त में अभी भविष्य की राह नजर नहीं आ रही है तो क्यों नहीं खुद को व्यस्त रखने के लिए सामुदायिक सेवा का काम किया जाए। इसी नेक उद्देश्य के साथ चंद दोस्तों के ग्रुप ने ऐसी कड़ी तैयार कर ली है, जो लखनऊ, दिल्ली, बिहार, हरियाणा तक जुड़ी है और पर्यावरण व स्वच्छता के काम में जुटी है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ युवाओं की कोशिशों के बारे में...। 
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विशालाक्षी फाउंडेशन - फोटो : अमर उजाला
विशालाक्षी फाउंडेशन के यूपी हेड हैं अलिंद अग्रवाल, जो उज्जवल मिश्रा, सिमरन अग्रवाल, मुस्कान वर्मा, नव्या श्रीवास्तव, शांभवी दुबे, जफर हुसैन, आर्यन कटियाल, अनंत दत्ता के साथ मिलकर शहर को साफ करने की कोशिश में जुटे हैं। अलिंद बताते हैं कि ग्रुप में स्टूडेंट के साथ उद्यमी और वकील भी है। लॉकडाउन ने सभी को सोचने को मजबूर किया। हमें लगा कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरा करना होगा। पहले हमने प्रोजेक्ट हंगर के तहत खाने की व्यवस्था की, अब हमारा लक्ष्य साफ-सफाई और हमारे पर्यावरण की देखभाल है। हफ्ते में एक दिन, शहर के अलग-अलग इलाकों को चुनते हैं, वहां सफाई करके कूड़ा इकट्ठा करके जनेश्वर मिश्रा पार्क के पास वाले कूड़ा घर तक पहुंचाते हैं। प्रोजेक्ट क्लीन एंड ग्रीन यानी सीएनजी के तहत लखनऊ में 150 युवा काम कर रहे हैं। आठ शहरों में करीब 2000 वालंटियर काम करते हैं। 

अपील: पर्यावरण हमारा है, हमारे ही कारण इस कदर प्रदूषित हो रहा है कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। इसे संवारने की कोशिश कीजिए। हफ्ते का एक दिन तय कर लीजिए अपना इलाका, हम खुद साफ करेंगे।

व्यस्त रहें मस्त रहे: अलिंद, सिमरन कहते हैं कि कोविड ने कई तरह की चुनौतियां पैदा की हैं। हम युवा कॅरियर, पढ़ाई को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। ऐसे में समाज के लिए कुछ करके, हमें खुशी मिली, जिसने हमें एक नई राह दिखाई है।
 
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मानव पर्यावरण संरक्षण संस्थान - फोटो : अमर उजाला
खुशियों के पल पौधों के संग
एक कोशिश कि सब स्वच्छ पर्यावरण में सांस लें। एक प्रयास की आनेवाले वक्त में कहीं हरियाली गुम न होने पाए। इस संकल्प के साथ काम कर रहे हैं मानव पर्यावरण संरक्षण संस्थान के युवा सदस्य। मानस चीर विजय और मानव सिंह बिसेन के नेतृत्व में हर घर को यही संदेश दिया जा रहा है कि खुशियां छोटी हों या बड़ी, मनाएं पौधों के संग। मानस व मानव बताते हैं कि जन्मदिन हो या शादी की सालगिरह या फिर अन्य कोई भी आयोजन, हम लोग पौधे लगाएंगे और लगवाएंगे। अब तक इस मिशन से 2000 से अधिक युवा जुड़े हैं। मानव ने खुद 108 हरिसंकरी लगाने का प्रण लिया है और कोविड काल में 27 पौधे लगा चुके हैं। अन्य सदस्यों में अमित प्रताप सिंह, शालिनी सिंह, शिव शंकर पांडेय, राजेश, अनिल, मोना, आकाश सिंह, चंद्रमोहन व अन्य शामिल हैं।

जिम्मेदारी का अहसास: मानस व मानव कहते हैं कि जिस दिन से हमने पर्यावरण के बारे में सोचना और उसे संवारने की कोशिश शुरू की है, उस दिन से हमें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास हुआ, उसे पूरा कर पा रहे हैं, इस सोच ने हमें तनाव मुक्त कर दिया है। 

अपील: मानव कहते हैं कि कभी कूड़ा फेंक कर तो कभी मूर्तियां विसर्जित कर हम नदियों को गंदा कर रहे। इस आदत पर रोक लगाएं। तोहफे में पौधा दें और जीवन के उन खास पलों, जिसमें आप पार्टी करते हैं, एक पौधा जरूर लगाएं।

 
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