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मिसालः सैकड़ों बच्चों में जगाई शिक्षा की अलख, काम के बाद लगाते हैं क्लास

Sat, 14 Dec 2019 12:13 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 14 Dec 2019 12:13 PM IST
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special story on social workers in lucknow
राहुल अग्रवाल और आलौकिक दीक्षित - फोटो : अमर उजाला

 वे मेहनतकश हैं। दिल लगाकर काम करते हैं और अपनी गाढ़ी कमाई से उन बच्चों के जीवन में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, जो गरीबी व मुफलिसी के शिकार हैं। उनके नसीब में किताबें नहीं थीं। कमाई की मजबूरी थी। पर, उन्हें शिक्षा ही नहीं इनोवेशन व क्रिएटिविटी से भी जोड़ा। किसी ने दुकान की कमाई इन बच्चों की पढ़ाई में लगाई तो किसी ने अपनी नौकरी की गाढ़ी कमाई से बच्चों को पढ़ाया। पेश है ऐसे समाजसेवियों पर आधारित रिपोर्ट।


 

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विनीत चतुर्वेदी - फोटो : अमर उजाला

दुकान की कमाई से बच्चों की पढ़ाई
न्यू हैदराबाद निवासी विनीत चतुर्वेदी मूलरूप से गोरखपुर के रहने वाले हैं और मेडिकल की तैयारी कर रहे हैं। गोरखपुर में उनकी कपड़ों की दुकान है। उससे होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं। विनीत बताते हैं कि दो बच्चों को अपने खर्च से मोंटफोर्ड में दाखिला करवाया है जबकि गरीब बस्ती में जाकर बच्चों को खुद पढ़ाता हूं। इस काम में मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स का भी सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि डॉ. अब्दुल कलाम से बहुत प्रभावित रहे हैं। लिहाजा उन्हीं के मार्ग पर चलते हुए अपने स्तर से यह सामाजिक कार्य कर रहे हैं। विनीत ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई के लिए आवश्यक स्टेशनरी, ड्रेस वगैरह भी वितरित कर देते हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव में हुनर का दम घुटते हुए नहीं देख सकते हैं। उनकी योजना है कि डॉक्टर बन जाने के बाद वह ऐसे बच्चों के लिए अपने संसाधनों से बड़े स्तर पर काम करने की।

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आलौकिक दीक्षित - फोटो : अमर उजाला

संवारना है बच्चों का भविष्य
सीतापुर रोड निवासी अलौकिक दीक्षित पेशे से निजी स्कूल में शिक्षक हैं और लखीमपुर में खेती है, जो वह खुद देखते हैं। अलौकिक अभी सिर्फ 28 साल के हैं और खेती से होने वाली आमदनी को बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं। अलौकिक ने बताया कि उनके पिता ने भी यही काम किया। खेती की कमाई से कई बच्चों के भविष्य संवारे। यह विरासत उन्हीं से मिली है और उसी के नक्शे-कदम पर वह भी चल रहे हैं। अलौकिक ने बताया कि उनसे जो बन सकता है, वह करते हैं। बच्चों की पढ़ाई करवाकर उन्हें मानसिक संतुष्टि व खुशी मिलती है, जो उन्हें अंदर से ताकत प्रदान करता है।

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राहुल अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
शिक्षा के साथ इनोवेशन व क्रिएटिविटी
लखनऊ निवासी राहुल अग्रवाल पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वह लखनऊ व सीतापुर में गरीब बच्चियों की पढ़ाई के लिए काम कर रहे हैं। इस काम में उनकी पत्नी रिद्घि अग्रवाल भी पूरा साथ देती हैं। उन्होंने बताया कि अपने खर्च से बच्चियों को पढ़ाती हैं। राहुल ने बताया कि पिछले छह साल से यह काम कर रहे हैं। अपनी कमाई बच्चों पर खर्च करते हैं।
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राहुल अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

जुलाई, 2013 में महमूदाबाद में रमद्वारी गांव में एक  सेंटर शुरू किया था, जहां 40 लड़कियों को पेड़ के नीचे पढ़ाते थे। अभी वहां 150 बच्चियां आ रही हैं। जिन्हें शिक्षा को इनोवेशन से जोड़ा है। मसलन, साइकिल से चारा काटने वाली मशीन व सोलर मोबाइल चार्जर बनाना सिखाते हैं। आगे बताया कि जब गांव में देखा कि लड़कियों की शादियां उम्र से पहले ही हो रही है तो मन उचट गया और उनकी शिक्षा पर काम करना शुरू कर दिया। लखनऊ में आशियाना सेक्टर के में भी केंद्र खोला है, जहां तीस बच्चे रोजाना आते हैं।

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