योग संपूर्ण स्वास्थ्य यानि कि शरीर और मन दोनों को स्वस्थ और फिट बनाए रखने का सबसे बेजोड़ तरीका माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याओं में नियमित रूप से योगासनों का अभ्यास करना आपको लाभ दिला सकता है। कुछ शोध बताते हैं कि जिन लोगों को ऑटोइम्यून डिसऑर्डर होता है वह भी योगाभ्यास से विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
Yoga Tips: ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में भी योगासनों से मिल सकता है लाभ, रुमेटीइड आर्थराइटिस में ये आसन हैं कारगर
ऑटो-इम्यून विकारों में योग के लाभ
योग विशेषज्ञ कहते हैं, तनाव को कम करने के अलावा, योग ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर के प्रबंधन में भी कई तरीकों से मदद कर सकता है, खासकर सूजन के कारण होने वाली दर्द की समस्या में इसके अभ्यास से लाभ पाया जा सकता है। शोध में रुमेटीइड आर्थराइटिस वाले लोगों में योगासनों के अभ्यास से काफी लाभ देखा गया है।
विशेषज्ञों ने पाया कि योग शरीर की गति मुद्रा, समन्वय और मांसपेशियों की ताकत में सुधार करके आर्थराइटिस वाले लोगों में सूजन और दर्द जैसी समस्याओं को ठीक करने में योगासन काफी लाभकारी हो सकते हैं। इसके लिए किसी योग प्रशिक्षक से मिलकर योगासनों के बारे में सही जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। विशेषज्ञ इन दो आसनों को ऐसे रोगियों के लिए काफी फायदेमंद मानते हैं।
सेतुबंधासन योग से लाभ
रुमेटीइड आर्थराइटिस की समस्या से परेशान लोगों के लिए सेतुबंधासन योग के अभ्यास को काफी फायदेमंद माना गया है। यह योग जांघों को फैलाने और छाती को खोलने के साथ कोर, कूल्हों और जांघों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है। उंगलियों के जोड़ों, कलाई और कंधों को मजबूत करने के साथ घुटनों को मजबूत बनाने में भी इसके लाभ पाए गए हैं। जिन लोगों को पीठ दर्द, तनाव और चिंता की समस्या बनी रहती है, ऐसे लोगों को भी सेतुबंधासन योग से लाभ मिल सकता है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ आर्थराइटिस वाले लोगों को किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही इसके अभ्यास करने की सलाह देते हैं।
पश्चिमोत्तानासन योग से लाभ
पश्चिमोत्तानासन योग का अभ्यास घुटनों की समस्याओं के शिकार लोगों को काफी लाभ दे सकता है, विशेषकर जिन लोगों को रुमेटीइड आर्थराइटिस की समस्या है उन्हें इसके अभ्यास से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। हैमस्ट्रिंग की स्ट्रेचिंग के साथ घुटने में रक्त प्रवाह को बढ़ाने में इस योग की आदत से लाभ पाया जा सकता है। यह योग गर्दन और कंधों को मजबूत बनाने के साथ आपकी जीवन शक्ति को बढ़ाने और प्रजनन स्वास्थ्य को भी लाभ दे सकता है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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