शरीर को बोझ उठाने से लेकर चलने-फिरने, उठने-बैठने और सारे काम करने में जोड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जोड़ आपकी कलाइयों के हों या पैरों के, उंगलियों के हों या फिर कंधों के हर जगह ये एक तरह के तकनीकी कल-पुर्जों की तरह काम करते हैं, इसलिए इन्हें दुरुस्त रखना बहुत जरूरी होता है। अगर जोड़ स्वस्थ रहेंगे तो इसका असर केवल शरीर पर ही नहीं बल्कि मानसिक सेहत पर भी पड़ेगा क्योंकि जोड़ों के दर्द, उठने-बैठने और काम करने में तकलीफ की लिंक डिप्रेशन और तनाव से भी जुड़ती है।
आज का योग टिप्स: जोड़ों को रखना है मजबूत, तो स्ट्रेचिंग करते हुए इन बातों का रखें विशेष ध्यान
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व्यायाम जरूरी है पर सावधानी के साथ
एक्सरसाइज केवल जोड़ों के लिए ही नहीं हड्डियों के लिए भी बहुत आवश्यक है। व्यायाम जोड़ों और हड्डियों को मजबूती देते हैं, उनमें लचीलापन बनाए रखता है। इसलिए एक्सरसाइज करना जरूरी है, लेकिन इस एक्सरसाइज के लिए भी कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।
जोड़ों की मजबूती के लिए जरूरी है कि कोई भी एक्सरसाइज एकदम से शुरू न की जाए। अधिक वजन के साथ या बढ़ती उम्र में भी एकदम से रस्सी कूदना, तेज दौड़ना या जोड़ों पर भार डालने वाली कोई भी एक्सरसाइज बिना किसी मार्गदर्शन में करना मुश्किल खड़ी कर सकता है।
स्ट्रेचिंग का सही समय
शरीर के लचीलेपन को बनाये रखने के लिए स्ट्रेचिंग एक जरूरी प्रक्रिया है। यही कारण है कि जिम में या स्पोर्ट्स के दौरान भी स्ट्रेचिंग पर विशेष ध्यान दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत समय पर की गई स्ट्रेचिंग भी जोड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकती है? यदि आप व्यायाम की शुरुआत में बिना वॉर्मअप सीधे स्ट्रेचिंग करते हैं तो यह जोड़ों के आस-पास की मांसपेशियों और लिगामेंट्स के लिए तकलीफदायक हो सकता है। इसलिए एक्सरसाइज से पहले कम से कम 10 मिनिट वॉर्मअप के जरिए शरीर को गर्मी दें ताकि मांसपेशियों को खुलने और फैलने का मौका मिले। इसके बाद स्ट्रेचिंग करें।
शरीर की मुद्रा को सही रखना है जरूरी
अगर पीठ को झुका कर, टेढ़े होकर, पैरों को झुलाते हुए या शरीर को एक तरफ झुका कर बैठना अगर आपकी आदत है, तो इसे जल्द से जल्द सुधार लें। गलत पोश्चर की यह आदत आपके जोड़ों को हमेशा के लिए खराब कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार आजकल कम उम्र में भी जोड़ों संबंधी समस्याओं का प्रतिशत इसलिए बढ़ा है क्योंकि घंटों तक लोग गलत पोश्चर में बैठे रहकर काम करते हैं।
अपने शरीर के वजन को हमेशा संतुलित रखें। जितना अधिक वजन, उतना ज्यादा जोड़ों के लिए खतरा। कोई भी चीज उठाते या पकड़ते समय पोश्चर सही रखें और बैग्स जैसी चीजें हाथ या कलाई पर देर तक टांगने की बजाय कंधे पर लटकाएं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
किसी भी तरह के दर्द या इंज्युरी को तुरंत देखें और यदि दिक्कत ज्यादा हो तो डॉक्टर की मदद भी लें। दर्द को नजरअंदाज न करें। पीठ, पेट, कूल्हे आदि की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए विशेष व्यायाम करें। पेट और पीठ की मजबूत मांसपेशियां शरीर का बैलेंस बनाए रखने में मदद करेंगी। इसके लिए योग जैसे वर्कआउट बहुत अच्छा विकल्प होंगे।
कई बार जोड़ों में दर्द या असहजता के कारण लोग अपने चलने-फिरने आदि को कम कर लेते हैं। उन्हें लगता है कि आर्थराइटिस या ऐसी ही स्थितियों में जोड़ों को आराम देना ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन याद रखिए एक्सरसाइज और चलना-फिरना, शरीर के लिए बहुत आवश्यकत है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।